चंडीगढ़. पंजाब की सियासत एक बार फिर गरमाने वाली है। राज्य एक बार फिर से चुनावी रंग में रंगने को तैयार है। लंबे समय से अटके हुए जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनावों की तारीखों का आखिरकार एलान कर दिया गया है। राज्य चुनाव आयोग ने शुक्रवार को एक अहम घोषणा करते हुए प्रदेश में चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है। राज्य चुनाव कमिश्नर राज कमल चौधरी ने चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर चुनाव की तारीखों और पूरी प्रक्रिया की जानकारी साझा की। इस घोषणा के साथ ही पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों यानी आधे राज्य में तत्काल प्रभाव से आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू कर दी गई है।
चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए कार्यक्रम के अनुसार, पंजाब की 23 जिला परिषदों और 154 पंचायत समितियों के लिए मतदान 14 दिसंबर को होगा। चुनाव संपन्न होने के तीन दिन बाद यानी 17 दिसंबर को मतों की गणना की जाएगी और नतीजों की घोषणा होगी। इन चुनावों की प्रक्रिया अगले महीने की शुरुआत से ही जोर पकड़ लेगी। चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार 1 दिसंबर से लेकर 4 दिसंबर तक अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। यह चुनाव पंजाब की ग्रामीण राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह सीधे तौर पर गांव और देहात के विकास कार्यों से जुड़ा होता है।
राज्य चुनाव कमिश्नर राज कमल चौधरी ने आंकड़ों की जानकारी देते हुए बताया कि इस चुनाव में प्रदेश के करीब 1.35 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। सटीक आंकड़ों की बात करें तो वर्तमान में मतदाताओं की संख्या 1,35,98,000 है। पिछली बार यह आंकड़ा 1.34 करोड़ था, जिसमें अब बढ़ोतरी हुई है। इस चुनावी प्रक्रिया में राज्य की 13,236 ग्राम पंचायतों के मतदाता हिस्सा लेंगे, जो इसे जमीनी स्तर का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक उत्सव बनाता है।
इस बार भी चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के जरिए नहीं, बल्कि पारंपरिक बैलट पेपर (मतपत्र) के माध्यम से ही कराए जाएंगे। इसके पीछे का कारण बताते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि उनके पास इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराने के लिए पर्याप्त ईवीएम की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनावों के लिए पूरे राज्य में कुल 19,174 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। मतदान प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए हर पोलिंग बूथ पर दो अलग-अलग बैलट बॉक्स रखे जाएंगे। एक बैलट बॉक्स जिला परिषद के प्रत्याशी के लिए होगा, जबकि दूसरा बॉक्स पंचायत समिति के प्रत्याशी के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
प्रशासनिक आंकड़ों में एक छोटा बदलाव भी देखने को मिला है। पिछले चुनावों के दौरान राज्य में 153 पंचायत समितियां थीं, लेकिन इस बार इनकी संख्या बढ़कर 154 हो गई है। शुक्रवार को हुई इस घोषणा के बाद से ही प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया है। 1 दिसंबर से नामांकन शुरू होते ही सियासी सरगर्मियां तेज हो जाएंगी और 17 दिसंबर को नतीजों के साथ ही गांव की सरकार की तस्वीर साफ हो जाएगी।
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