Iraq: ईरान के बाद अब ईरान में पीएमएफ के ठिकानों पर हवाई हमले

बगदाद। इराक के सैन्य अड्डों पर शुक्रवार को जबरदस्त हवाई हमले हुए हैं। बगदाद के दक्षिण…

Kiev: यूक्रेन के शहर चेर्नेहिव पर रूस का हमला, 17 नागरिकों की मौत

कीव। यूक्रेन के शहर चेर्नेहिव को रुस की मिसाइलों ने निशाना बनाया। हमले में कम से कम…

Myanmar: आंग सान सू की को जेल से नजरबंध में स्थानांतरित किया

बैंकॉक।म्यांमार की लोकतंत्र समर्थक नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की को भीषण गर्मी के बीच स्वास्थ्य कारणों से जेल से नजरबंदी में स्थानांतरित कर दिया गया है। 78 वर्षीय सू की पर विभिन्न आरोपों में 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी, जिन्हें उनके समर्थक राजनीति से प्रेरित मानते हैं। मुख्य बिंदु: गर्मी से राहत: म्यांमार में भीषण गर्मी के कारण आंग सान सू की और पूर्व राष्ट्रपति विन म्यिंट सहित कई बुजुर्ग कैदियों को जेल से बाहर लाया गया। नजरबंदी: सू की को नेपीता में उनके घर में नजरबंद रखा गया है, जबकि विन म्यिंट को ताउंगू में नजरबंद किया गया है। राजनीतिक संघर्ष: म्यांमार में 2021 में सेना द्वारा चुनी हुई सरकार को हटाए जाने के बाद से राजनीतिक संघर्ष जारी है। अंतर्राष्ट्रीय निंदा: सेना के इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा की जा रही है और सू की की रिहाई की मांग की जा रही है। भविष्य: आंग सान सू की की नजरबंदी म्यांमार में चल रहे राजनीतिक संघर्ष में एक नया मोड़ है। यह देखना बाकी है कि क्या यह कदम देश में शांति और स्थिरता की दिशा में कोई कदम बढ़ाएगा या तनाव को और बढ़ाएगा।

US: अमेरिका के हस्ताक्षेप के बाद ईरान पर आग बबूला इजरायल के नरम पड़े तेवर

तेल अवीव में हाल ही में ईरान द्वारा किए गए हमले के बाद, इजरायल की प्रतिक्रिया अपेक्षा से कम आक्रामक रही है। इसके पीछे अमेरिका का दबाव प्रमुख कारण माना जा रहा है। आइए, इस स्थिति का विश्लेषण करते हैं: घटनाक्रम: इजरायल पर सीरिया में ईरानी दूतावास पर हमला करने और राजदूतों को मारने का आरोप लगाया गया। इसके जवाब में, ईरान ने इजरायल पर 300 ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। इजरायल के रक्षा तंत्र ने कई मिसाइलों को रोक दिया, लेकिन कुछ ने नुकसान पहुंचाया। इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने जवाबी कार्रवाई की कसम खाई, लेकिन “वार कैबिनेट“ बैठक में समय और तरीके पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। अमेरिका का हस्तक्षेप: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने नेतन्याहू से बात की और स्पष्ट किया कि अमेरिका युद्ध में सक्रिय रूप से भाग नहीं लेगा। बाइडन ने हथियार और अन्य सहायता का आश्वासन दिया, लेकिन युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया। अमेरिका का मानना ​​है कि युद्ध से पश्चिम एशिया में स्थिति और बिगड़ जाएगी। इजरायल की नरमी के कारण: अमेरिकी दबाव: अमेरिका का समर्थन इजरायल के लिए महत्वपूर्ण है। अमेरिका के युद्ध में शामिल न होने के फैसले ने इजरायल की आक्रामक प्रतिक्रिया की संभावना को कम कर दिया है। क्षेत्रीय स्थिरता: इजरायल को इस बात की भी चिंता है कि पूर्ण युद्ध से क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा हो सकता है और अन्य देशों को भी संघर्ष में घसीटा जा सकता है। आंतरिक राजनीति: नेतन्याहू की सरकार आंतरिक राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। एक बड़ा युद्ध जनता के बीच अलोकप्रिय साबित हो सकता है। भविष्य: अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि इजरायल कैसे प्रतिक्रिया देगा। सीमित जवाबी कार्रवाई या कूटनीतिक प्रयासों की संभावना है।…

US: ईरान कभी भी कर सकता है इजरायल पर हमला- अमेरिका

नई दिल्ली। इजरायल की गाजा में जंग के बीच अब एक नया युद्ध छिड़ने की कगार…

US: मिशिगन स्कूल में गोलाबारी कर चार की हत्या करने वाले किशोर के माता-पिता को 10 साल की सजा

मिशिगन ।  2021 में ऑक्सफोर्ड, मिशिगन के एक स्कूल में गोलीबारी में चार छात्रों की हत्या…

India-Maldives Row: मालद्वीव की नेता ने किया तिरंगे का अपमान, बाद में पोस्ट की डिलीट

मालदीव की एक नेता ने एक बार फिर भारत विरोधी रुख अपनाते हुए विवाद खड़ा कर दिया है। एमडीपी पार्टी पर निशाना साधते हुए शेयर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने पार्टी के लोगो की जगह भारतीय तिरंगे का अशोक चक्र लगा दिया था। हालांकि, विवाद बढ़ने पर उन्होंने पोस्ट को डिलीट कर दिया। पहले भी कर चुकी हैं विवादित टिप्पणी: यह पहली बार नहीं है जब इस नेता ने भारत विरोधी बयान दिया हो। इससे पहले जनवरी में उन्होंने पीएम मोदी के लक्षद्वीप दौरे पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। जिसके बाद उनकी पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था। भारत–मालदीव संबंधों पर असर: इस घटना से दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ सकता है। भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Gaza: गाजा में राहतकर्मियों की मौत पर इजराइल बैकफुट पर, दो अधिकारी बर्खास्त

यरुशलम: गाजा पट्टी में राहतकर्मियों पर हुए हमले के बाद इज़राइल बैकफुट पर आ गया है। इस घटना में सात राहतकर्मियों की मौत हो गई थी, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इज़राइल की कड़ी आलोचना हुई। इस मामले में इज़राइली सेना ने दो अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है और तीन अन्य को फटकार लगाई है। रिटायर्ड जनरल की जांच में खुला मनमाने हमलों का राज रिटायर्ड जनरल योएव हर–इवेन की शुरुआती जांच में पता चला है कि गाजा में इज़राइली सेना मनमाने ढंग से हमले कर रही थी और उसे इस बात की परवाह नहीं थी कि निशाना कौन बन रहा है। इस घटना के लिए पांच अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया है। अमेरिका ने दी समर्थन पर पुनर्विचार की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि बार–बार कहने के बावजूद इज़राइल ने गाजा में आम नागरिकों और राहतकर्मियों को हमलों से बचाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर आम नागरिकों और राहतकर्मियों की मौत का सिलसिला जारी रहा तो अमेरिका इज़राइल को दिए जा रहे अपने समर्थन पर पुनर्विचार कर सकता है। राहत सामग्री के लिए खोला गया क्रॉसिंग अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच इज़राइल सरकार ने उत्तरी गाजा में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए इरेज क्रॉसिंग को खोलने का फैसला किया है। इसके अलावा दक्षिणी गाजा में सामग्री पहुंचाने के लिए अशडोब बंदरगाह पर जहाजों को लंगर डालने की अनुमति दी जाएगी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने की निंदा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) ने गाजा पट्टी में इज़राइली सेना की कार्रवाई के विरोध में आए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। परिषद ने गाजा में इज़राइली सेना द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन की घटनाओं पर चिंता जताई है और उसकी निंदा की है।

China: चीन ने अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों के बदले नाम, भारत ने किया खारिज

बीजिंग: समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, चीन ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों के नाम बदलकर उकसाने वाली कार्रवाई की है। चीन द्वारा जारी की गई यह चौथी सूची है जिसमें 30 नए नाम शामिल हैं। हालांकि, भारत ने चीन के इस कदम को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत ने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और नाम बदलने से इस वास्तविकता में कोई बदलाव नहीं आएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस आदेश को 1 मई से लागू करने का प्रावधान है। इसमें कहा गया है कि चीन के क्षेत्रीय दावों और संप्रभुता के अधिकारों को नुकसान पहुंचाने वाले विदेशी भाषाओं के नामों को बिना प्राधिकरण के सीधे उद्धृत या अनुवादित नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है और उसे “ज़ंगनान“ कहता है। साथ ही, चीन अरुणाचल प्रदेश को तिब्बती क्षेत्र बताता है। यह पहली बार नहीं है जब चीन ने अरुणाचल प्रदेश में जगहों के नाम बदलने की कोशिश की है। इससे पहले भी 2017, 2021 और 2023 में चीन ने ऐसी सूचियाँ जारी की थीं। भारत का रुख इस मामले पर स्पष्ट है: अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और चीन द्वारा नाम बदलने से इस तथ्य में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

UN: केजरीवाल की गिरफ्तार पर अमेरिका-जर्मनी के बाद संयुक्त राष्ट्र बोला

इस साल भारत और कई अन्य देशों में चुनाव होने जा रहे हैं, जिसे देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता ने उम्मीद जताई है कि इन देशों में लोगों के राजनीतिक और नागरिक अधिकारों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी को स्वतंत्र और निष्पक्ष माहौल में मतदान करने का अधिकार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने गुरुवार को भारत के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की। उनसे विशेष रूप से आगामी आम चुनावों से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी और विपक्षी कांग्रेस पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज करने के मद्देनजर भारत में राजनीतिक अशांति के बारे में पूछा गया था। दुजारिक ने कहा, “हमें पूरी उम्मीद है कि भारत में, जैसा कि चुनाव वाले किसी भी देश में होता है, सभी के अधिकारों का सम्मान किया जाएगा, जिसमें राजनीतिक और नागरिक अधिकार शामिल हैं, और हर कोई स्वतंत्र और निष्पक्ष माहौल में मतदान करने में सक्षम होगा।“ संयुक्त राष्ट्र की यह प्रतिक्रिया अमेरिका द्वारा इसी तरह के सवाल पर टिप्पणी करने के एक दिन बाद आई है, जिसके विरोध में केजरीवाल की गिरफ्तारी पर टिप्पणी के लिए एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक को तलब किया गया था। तलब किए जाने के कुछ घंटों बाद, वाशिंगटन ने फिर से दोहराया कि वह निष्पक्ष, पारदर्शी और समय पर कानूनी प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करता है। विदेश मंत्रालय (MEA) के अधिकारियों ने मिशन के कार्यवाहक उप प्रमुख ग्लोरिया बर्बेना को दिल्ली में साउथ ब्लॉक स्थित अपने कार्यालय में बुलाया। बैठक 30 मिनट से अधिक समय तक चली। गुरुवार को, भारत ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर अमेरिकी विदेश विभाग की हालिया टिप्पणी ‘अनुचित‘ है और कहा कि देश को ‘अपने स्वतंत्र और मजबूत लोकतांत्रिक संस्थानों पर गर्व है‘ और उन्हें किसी भी प्रकार के अनुचित बाहरी प्रभाव से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने नई दिल्ली में अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि भारत की चुनावी और कानूनी प्रक्रियाओं पर कोई भी बाहरी आरोप पूरी तरह से अस्वीकार्य है। बागची ने गुरुवार को कहा, “भारत में कानूनी प्रक्रियाएं केवल कानून के शासन द्वारा संचालित होती हैं।“ इससे पहले बुधवार को विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बयान में कहा था कि भारत ने कुछ कानूनी कार्यवाही के बारे में अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है।