चंडीगढ़। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी संगरूर में इंसाफ रैली के जरिए पार्टी के चुनावी अभियान को गति देंगे। वहीं भाजपा चंडीगढ़ में ‘जख्म 84 दे’ नाम से एक दिवसीय कॉन्क्लेव आयोजित कर दंगों, पीड़ित परिवारों की न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई और उनके पुनर्वास का मुद्दा उठाएगी। दोनों दलों के कार्यक्रम एक ही दिन होने से राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है।
संगरूर से कांग्रेस के चुनावी अभियान की शुरुआत
राहुल गांधी की संगरूर रैली को कांग्रेस ने अपने ‘हिसाब मांगो’ अभियान का हिस्सा बनाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले में आयोजित होने वाली इस रैली के जरिए पार्टी आम आदमी पार्टी सरकार को उसके कार्यकाल के दौरान उठे मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है।
कांग्रेस को रैली में एक लाख से अधिक लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। प्रदेश कांग्रेस के नेता इसे 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के औपचारिक अभियान की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।
रैली में पंजाब के अधिकारों, किसानों की समस्याओं, युवाओं के रोजगार, कानून-व्यवस्था, नशे के कारोबार और बेअदबी के मामलों में न्याय में देरी जैसे मुद्दे उठाए जा सकते हैं। कांग्रेस नेता परगट सिंह पहले ही राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था बिगड़ने, पुलिस और प्रशासन का मनोबल कमजोर होने तथा आम लोगों का संस्थाओं से भरोसा उठने के आरोप लगा चुके हैं। नदी जल विवाद और पंजाब के हितों से जुड़े सवाल भी पार्टी के एजेंडे में शामिल हैं।
चंडीगढ़ में भाजपा का ‘जख्म 84 दे’ कॉन्क्लेव
दूसरी ओर भाजपा चंडीगढ़ के सेक्टर-24 स्थित होटल पार्कव्यू में सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक ‘जख्म 84 दे’ कॉन्क्लेव आयोजित करेगी। पार्टी के मुताबिक, कार्यक्रम का उद्देश्य 1984 की हिंसा से जुड़े तथ्यों को नई पीढ़ी के सामने रखना और पीड़ित परिवारों के न्याय के संघर्ष को सामने लाना है।
कॉन्क्लेव में पीड़ित परिवारों, प्रत्यक्षदर्शियों, कानूनी विशेषज्ञों, पूर्व न्यायाधीशों और राजनीतिक प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम की शुरुआत हिंसा से संबंधित तस्वीरों की प्रदर्शनी के उद्घाटन से होगी। इसका उद्घाटन पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और प्रदेश प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया करेंगे। उद्घाटन सत्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद मुख्य संबोधन देंगे।
छह सत्रों में उठेंगे न्याय और जांच से जुड़े सवाल
कॉन्क्लेव में कुल छह सत्र रखे गए हैं। पहले सत्र में हिंसा के प्रत्यक्षदर्शी अपने अनुभव साझा करेंगे। इसमें निरप्रीत कौर भी शामिल होंगी, जो सज्जन कुमार को सजा दिलाने वाले मामले में महत्वपूर्ण गवाह रही हैं।
दूसरे सत्र में 1984 की हिंसा के पीछे कथित साजिश और सरकारी स्तर पर भूमिका से जुड़े सवालों पर चर्चा होगी। इसमें सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी हिस्सा लेंगे। उन्होंने हिंसा में अपने परिवार के पांच सदस्यों को खोया था। पूर्व राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष तरलोचन सिंह भी ऑनलाइन जुड़ेंगे।
एक अन्य सत्र में जांच की कथित खामियों और न्याय मिलने में हुई देरी पर चर्चा होगी। इसमें विशेष जांच दल के पूर्व प्रमुख न्यायमूर्ति एसएन ढींगरा, वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका और अधिवक्ता अशोक कश्यप शामिल होंगे। दोषियों को सजा दिलाने के प्रयासों पर होने वाले सत्र में दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और एचएस फूलका भाग लेंगे।
समापन सत्र में पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए भाजपा सरकारों की ओर से किए गए प्रयासों पर चर्चा होगी। इसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, सतीश पूनिया, केवल सिंह ढिल्लों और सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी शामिल होंगे। पूरे कार्यक्रम का संचालन भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह करेंगे।
इस तरह कांग्रेस संगरूर से आम आदमी पार्टी सरकार को घेरने और चुनावी समर्थन जुटाने की कोशिश करेगी, जबकि भाजपा 1984 के दंगों और पीड़ितों को न्याय दिलाने के मुद्दे पर कांग्रेस को निशाने पर रखेगी। चुनाव से पहले दोनों कार्यक्रमों ने पंजाब की राजनीति में पुराने मुद्दों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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