नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क और प्रतिबंधों को लागू करने से फिलहाल छूट देने का फैसला किया है। इस कदम से भारत और चीन को राहत मिलने की उम्मीद है। ट्रंप प्रशासन रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा था। हालांकि, नए कार्यकारी आदेश के बाद इन प्रावधानों को लागू करने की प्रक्रिया फिलहाल टल गई है। यह राहत स्थायी होगी या कुछ समय बाद प्रतिबंध दोबारा लागू किए जाएंगे, इस बारे में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ट्रंप ने शुक्रवार देर रात जारी कार्यकारी आदेश में कहा कि संबंधित कानून के तहत प्रस्तावित प्रतिबंधों और शुल्कों को लागू करने से छूट दी जा रही है। उन्होंने कांग्रेस को इस फैसले के संबंध में प्रमाणपत्र भी सौंपा और इसे अमेरिका के राष्ट्रीय हित में उठाया गया कदम बताया।
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर था भारी शुल्क लगाने का प्रस्ताव
अमेरिका में रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किए गए प्रस्तावित कानून में रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाने का प्रावधान शामिल है। इसके तहत कुछ देशों पर 100 प्रतिशत या उससे अधिक टैरिफ लगाए जाने की संभावना जताई गई थी। प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि ऐसे कदमों से रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई पर अंकुश लगाया जा सकता है और यूक्रेन युद्ध को लेकर मॉस्को पर दबाव बढ़ाया जा सकता है।
इस पहल के प्रमुख समर्थकों में अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का नाम शामिल रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रूस से ऊर्जा संसाधन खरीदने वाले प्रमुख व्यापारिक साझेदारों को निशाना बनाने की योजना थी। हालांकि, शुल्कों की वास्तविक दर और उनके दायरे का निर्धारण संबंधित कानून तथा प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर करेगा।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। रूस से मिलने वाला तेल भारतीय ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में रूसी तेल की खरीद के कारण अमेरिका की ओर से अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने पर भारतीय निर्यात और व्यापार पर असर पड़ने की आशंका थी।
चीन भी रूसी ऊर्जा का बड़ा खरीदार है। इसलिए प्रस्तावित प्रतिबंधों को फिलहाल लागू नहीं करने के फैसले से दोनों एशियाई देशों को संभावित व्यापारिक दबाव से राहत मिल सकती है। हालांकि, इस फैसले का वास्तविक आर्थिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन आगे ऊर्जा व्यापार को लेकर क्या नीति अपनाता है।
रूस और अमेरिका के संबंधों में भी दिख रहा बदलाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ट्रंप रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त कराने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति दोनों देशों के नेतृत्व से युद्ध रोकने की अपील कर चुके हैं। वहीं, यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की को लेकर ट्रंप की टिप्पणियों और रूस के साथ बातचीत की पहल ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा बढ़ाई है।
भविष्य में दोबारा लागू हो सकते हैं प्रतिबंध
रूस से जुड़े प्रस्तावित टैरिफ पर मौजूदा छूट को स्थायी राहत नहीं माना जा सकता। अमेरिकी प्रशासन भविष्य में परिस्थितियों और राष्ट्रीय हितों का आकलन करने के बाद प्रतिबंधों को लागू करने पर फिर विचार कर सकता है। ऐसे में भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल ट्रंप के फैसले से भारत और चीन पर तत्काल अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की आशंका कम हुई है। हालांकि, आगे की स्थिति अमेरिकी प्रशासन के निर्णयों और रूस के साथ ऊर्जा व्यापार को लेकर होने वाले नीतिगत बदलावों पर निर्भर करेगी।
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