चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान को निर्णायक चरण में पहुंचाने का दावा करते हुए पुलिस विभाग में 10 हजार नई भर्तियों की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि नशा तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पुलिस को हर वैध और जरूरी कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों से गांवों और शहरों तक पहुंचकर लोगों को अभियान से जोड़ने तथा नशे के नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आह्वान किया।
फिल्लौर स्थित महाराजा रणजीत सिंह अकादमी में आयोजित ‘एसएचओ मिलनी’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे थाना प्रभारियों से सीधे संवाद किया और बेहतर कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह पहल पुलिस अधिकारियों की कार्य परिस्थितियों, समस्याओं और कल्याण से जुड़े मुद्दों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री के अनुसार, एसएचओ पुलिस व्यवस्था का स्थानीय चेहरा होते हैं और आम लोग अपनी समस्याओं, सुरक्षा तथा न्याय के लिए सबसे पहले उनके पास पहुंचते हैं।
मान ने कहा कि सरकार पुलिसकर्मियों की वास्तविक परेशानियों को समझते हुए उनके कल्याण पर ध्यान दे रही है, लेकिन इसके साथ पुलिस से ईमानदारी, जवाबदेही और पेशेवर रवैये की अपेक्षा भी है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में जनता का सहयोग लगातार बढ़ रहा है। लोगों से मिलने वाली सूचनाओं पर समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पुलिस को आधुनिक तकनीक और संसाधनों से मजबूत किया जा रहा है। सीसीटीवी, एंटी-ड्रोन सिस्टम, आधुनिक वाहनों और तकनीकी सुविधाओं के अलावा एआई आधारित निगरानी व्यवस्था को भी पुलिसिंग का हिस्सा बनाया जा रहा है। उन्होंने सड़क सुरक्षा बल का उदाहरण देते हुए कहा कि विशेषज्ञ और तकनीक आधारित पुलिस व्यवस्था से आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई को मजबूती मिली है।
भर्ती को लेकर उन्होंने बताया कि 450 एएसआई की सीधी भर्ती की जा रही है, जबकि करीब 3,400 पुलिसकर्मी प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसके अलावा अगले वित्त वर्ष में 10 हजार और पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्तियां पारदर्शी और योग्यता आधारित प्रक्रिया से होंगी।
नशे के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख करते हुए मान ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में एनडीपीएस एक्ट के तहत 95,644 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं और करीब 1.27 लाख गिरफ्तारियां हुईं। उनके अनुसार, 7,265 किलोग्राम से अधिक हेरोइन बरामद की गई और नशा तस्करों की 375 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। गांव रक्षा समितियों से मिली सूचनाओं के आधार पर भी कार्रवाई की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान केवल तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं होना चाहिए। स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में जागरूकता बढ़ाने के साथ नशे की लत से प्रभावित लोगों के उपचार और पुनर्वास पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पंजाब को नशामुक्त भविष्य की ओर ले जाने के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।
सीमा सुरक्षा का जिक्र करते हुए मान ने कहा कि पाकिस्तान से लगी 553 किलोमीटर लंबी सीमा के कारण पंजाब के सामने अतिरिक्त चुनौती है। ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने में सीमावर्ती गांवों के लोगों की सतर्कता और पुलिस को समय पर सूचना देना महत्वपूर्ण है। उन्होंने पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई पूरे पंजाब की साझा जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में मुख्य सचिव केएपी सिन्हा, डीजीपी गौरव यादव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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