नई दिल्ली, 30 सितंबर। देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के बीच निर्वाचन आयोग ने मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव किया है। आयोग ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 से SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा को हटा दिया है, जहां मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण पूरा हो चुका है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, SIR की प्रक्रिया समाप्त होने वाले राज्यों में अब नए मतदाताओं को पंजीकरण के लिए केवल निर्धारित वैधानिक फॉर्म-6 ही भरना होगा। यह फॉर्म मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इस्तेमाल किया जाता है। अतिरिक्त घोषणा को ECINET ऐप और पोर्टल के साथ-साथ संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के पोर्टल से भी हटा दिया गया है।
आयोग का यह कदम पूर्ण आयोग की ओर से हाल में दिए गए स्पष्टीकरण के बाद आया है। आयोग ने स्पष्ट किया था कि फॉर्म-6 के साथ जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा स्थायी व्यवस्था नहीं है और इसका इस्तेमाल केवल उन क्षेत्रों में SIR की प्रक्रिया के दौरान किया जाना है, जहां पुनरीक्षण अभियान चल रहा है।
इन राज्यों में जारी रहेगी अतिरिक्त घोषणा
जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अभी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है, वहां नए मतदाता फॉर्म-6 के साथ संबंधित अतिरिक्त घोषणा भी भरेंगे। इस घोषणा में आवेदक को अपने या अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी के संबंध में पूर्व में तैयार की गई मतदाता सूचियों से जुड़ी जानकारी देनी होती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य पुनरीक्षण के दौरान मतदाता के विवरण को पहले से मौजूद निर्वाचन रिकॉर्ड से जोड़ना है। हालांकि, SIR पूरा होने के बाद संबंधित राज्यों में यह अतिरिक्त आवश्यकता हटा दी गई है और सामान्य मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया लागू रहेगी।
फॉर्म-6 को लेकर कैसे शुरू हुआ विवाद
फॉर्म-6 में अतिरिक्त घोषणा को शामिल किए जाने को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर भी मतभेद की खबरें सामने आई थीं। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव को लेकर आपत्ति जताई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, विवेक जोशी का मत था कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित किसी फॉर्म में बदलाव करने के लिए संबंधित नियमों में आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए। सुखबीर सिंह संधू ने भी इसी तरह की आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि ECINET पर अतिरिक्त घोषणा उपलब्ध कराए जाने के बाद इसे हटाने की मांग भी की गई थी।
आयोग ने क्या कहा
निर्वाचन आयोग ने दूसरी ओर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में कोई औपचारिक संशोधन नहीं किया गया था। आयोग के मुताबिक, अतिरिक्त घोषणा SIR के दौरान आवश्यक जानकारी जुटाने के लिए अलग से जोड़ी गई व्यवस्था थी। आयोग ने बिहार में SIR से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया था और कहा था कि अदालत ने इस घोषणा की व्यवस्था को स्वीकार किया है।
इस तरह SIR समाप्त हो चुके क्षेत्रों में मतदाता पंजीकरण अब सामान्य फॉर्म-6 के माध्यम से होगा, जबकि पुनरीक्षण अभियान जारी रहने वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त घोषणा की व्यवस्था फिलहाल बनी रहेगी।