Punjab: पंजाब नेशनल फ्रंटियर एआई फंड में हिस्सेदारी की तैयारी करे

चंडीगढ़, 29 सितंबर 2026। पंजाब को केंद्र सरकार के प्रस्तावित नेशनल फ्रंटियर एआई एंड कंप्यूट फंड में अपनी संभावित हिस्सेदारी को लेकर अभी से तैयारी शुरू करनी चाहिए। केंद्र स्तर पर प्रस्तावित इस फंड का आकार करीब 15 हजार से 20 हजार करोड़ रुपये के बीच होने की चर्चा है। हालांकि इसकी अंतिम राशि, संरचना और संचालन व्यवस्था अभी तय नहीं हुई है। प्रस्ताव के तहत देश में उन्नत एआई मॉडल, जीपीयू क्लस्टर, विशेष डाटा सेंटर और अन्य कंप्यूटिंग ढांचे के लिए दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है।

पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भेजकर फंड के उपयोग और निगरानी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर स्पष्ट व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब को कृषि, जल प्रबंधन, फसल संबंधी सलाह और पंजाबी भाषा की तकनीक जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं के आधार पर परियोजनाएं तैयार करनी चाहिए।

सिद्धू के अनुसार पंजाब में कृषि से जुड़े आंकड़ों का बड़ा आधार मौजूद है। भूमि रिकॉर्ड, फसल और सिंचाई से संबंधित आंकड़ों के साथ राज्य के तकनीकी एवं इंजीनियरिंग संस्थान एआई आधारित समाधान तैयार करने में उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं। उनका सुझाव है कि इन संसाधनों का इस्तेमाल किसानों के लिए बेहतर फसल सलाह और जल प्रबंधन से जुड़े एआई मॉडल विकसित करने में किया जा सकता है।

उन्होंने पंजाबी भाषा के लिए विशेष एआई मॉडल तैयार करने की जरूरत पर भी जोर दिया। ऐसे मॉडल सरकारी सेवाओं, शिक्षा और आम नागरिकों के लिए डिजिटल सेवाओं में उपयोग किए जा सकते हैं। उनका मानना है कि भारतीय भाषाओं में तकनीकी समाधान विकसित करना एआई के विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मोहाली में एआई और डाटा सेंटर क्षमता विकसित करने का सुझाव

सिद्धू ने मोहाली के आइटी क्षेत्र को एआई और डाटा सेंटर से संबंधित गतिविधियों के लिए उपयोग करने की संभावना भी सामने रखी है। इसके लिए बिजली, जमीन और अन्य आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए राज्य को पहले से योजना तैयार करने का सुझाव दिया गया है।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को केंद्रीय फंड की अंतिम रूपरेखा का इंतजार करने के बजाय अपने स्तर पर एआई मिशन सेल गठित कर राज्य से जुड़ी संभावित परियोजनाओं की सूची तैयार करनी चाहिए। इन प्रस्तावों को संबंधित केंद्रीय मंत्रालय के समक्ष रखा जा सकता है, ताकि फंड की संरचना तय होने के दौरान पंजाब की प्राथमिकताएं भी सामने रहें।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

सिद्धू ने फंड के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली कंप्यूट क्षमता के इस्तेमाल की जानकारी नियमित रूप से सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया कि मौजूदा एआई कंप्यूट संसाधनों के उपयोग से संबंधित आंकड़े हर तिमाही जारी किए जाएं।

इसके अलावा फंड से समर्थित परियोजनाओं के आउटपुट, परिणाम और वास्तविक प्रभाव की वार्षिक रिपोर्ट संसद के सामने रखने की बात कही गई है। उन्होंने एआई मॉडलों के स्वतंत्र मूल्यांकन और निवेश से हासिल होने वाले परिणामों की स्पष्ट निगरानी व्यवस्था की जरूरत भी बताई है।

प्रस्तावित फंड अभी विचार-विमर्श के चरण में है। ऐसे में इसके अंतिम स्वरूप के साथ-साथ राज्यों की भागीदारी और संसाधनों के आवंटन की व्यवस्था भी बाद में स्पष्ट होगी।

 

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