हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने पूरी कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला एक ऐसे अपराधी का है जिसने न केवल हत्या की सजा के दौरान पैरोल का उल्लंघन किया, बल्कि चार दशकों तक फरार रहकर सरकारी शिक्षक की नौकरी भी की। हैरानी की बात यह है कि इस व्यक्ति ने अपनी सेवा के दौरान ‘बेस्ट टीचर’ का सम्मान भी हासिल किया और बिना किसी रोक-टोक के रिटायरमेंट भी ले लिया।
40 साल की फरारी और सम्मानजनक जीवन का सच
इस पूरे मामले का मुख्य किरदार संडेला वीरन्ना है, जिसकी उम्र वर्तमान में लगभग 70 वर्ष है। संडेला वीरन्ना को 1970 के दशक के अंतिम वर्षों में एक हत्या के मामले में आरोपी बनाया गया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, 1983 में अदालत ने उसे दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। जेल जाने के महज छह महीने बाद ही उसे कुछ दिनों के लिए पैरोल पर रिहा किया गया था। नियमों के अनुसार उसे पैरोल की अवधि समाप्त होने पर वापस जेल में आत्मसमर्पण करना था, लेकिन वह कभी वापस नहीं लौटा। जेल से बाहर आने के बाद उसने अपनी पहचान छिपाई और महबूबाबाद जिले के डंथलापल्ली में रहने लगा।
फरार अपराधी से ‘बेस्ट टीचर’ तक का सफर
कानून की नजरों में फरार संडेला वीरन्ना ने बाहर रहकर न केवल एक सामान्य जीवन जिया, बल्कि सरकारी तंत्र में सेंध लगाते हुए शिक्षक की नौकरी भी हासिल कर ली। उसने चार दशकों तक एक शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं और अपनी छवि को इतना साफ-सुथरा बनाए रखा कि किसी को उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि का पता नहीं चला। उसकी कार्यक्षमता के आधार पर 2004 में उसे ‘बेस्ट टीचर’ के पुरस्कार से भी नवाजा गया। संडेला वीरन्ना ने 2013 में शिक्षक के पद से सम्मानजनक तरीके से रिटायरमेंट लिया और पेंशन सहित अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने लगा।
पुलिस की कार्रवाई और अदालती सुनवाई
संडेला वीरन्ना का यह खेल मई 2024 में तब समाप्त हुआ जब तेलंगाना जेल विभाग की स्पेशल टास्क फोर्स ने महबूबाबाद पुलिस के साथ मिलकर उसे धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद उसे चेर्लापल्ली सेंट्रल जेल भेज दिया गया। हाल ही में उसकी पत्नी संडेला चरम्मा ने तेलंगाना हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर उसकी रिहाई की मांग की थी। याचिका में मानवीय और मेडिकल आधार पर पैरोल की अपील की गई थी, जिसे कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। जस्टिस टी माधवी देवी ने इस मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि को छिपाकर सरकारी नौकरी प्राप्त करना एक बड़ा धोखा है। कोर्ट ने माना कि संडेला वीरन्ना ने पूरी व्यवस्था को भ्रमित कर यह पद हासिल किया था।
बीमारी का तर्क और कानून का सख्त रुख
संडेला वीरन्ना की पत्नी संडेला चरम्मा ने अदालत में दलील दी थी कि उनका बेटा ब्रिटेन का स्थायी निवासी है और घर पर उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि संडेला वीरन्ना कई गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं और उनकी स्थिति लगातार खराब हो रही है, जिसके लिए उन्हें विशेष उपचार की आवश्यकता है। हालांकि, सरकारी वकील महेश राजे ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि संडेला वीरन्ना ने पैरोल के बाद जानबूझकर खुद को कानून से छिपाया और उसे पकड़ने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जेल परिसर में पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध हैं और जरूरत पड़ने पर कैदियों को विशेषज्ञ उपचार भी दिया जाता है।