रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीबीआई) परीक्षा और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) की नियुक्ति प्रक्रिया को रद करने का आदेश जारी किया गया था। अदालत के इस निर्णय से उन हजारों अभ्यर्थियों और पूर्व में चयनित कर्मियों को बड़ी राहत मिली है, जो सरकार के अचानक लिए गए इस फैसले से अधर में लटक गए थे। हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यह महत्वपूर्ण अंतरिम राहत प्रदान की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक इस विषय पर विस्तृत सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक रद करने का आदेश प्रभावी नहीं रहेगा। गौरतलब है कि गुरुवार को भी अदालत ने तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार के आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। अभ्यर्थियों का पक्ष रख रहे वकीलों ने दलील दी कि परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को इस प्रकार अचानक रद करना न केवल उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह प्रशासनिक सिद्धांतों के भी विरुद्ध है।
सरकार से मांगा गया जवाब
उच्च न्यायालय ने इस मामले में राज्य सरकार के रुख पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उनसे जवाब तलब किया है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस पूरे प्रकरण पर अपना विस्तृत पक्ष और जवाब दाखिल करे। कोर्ट यह जानना चाहता है कि किन आधारों और परिस्थितियों में इन परीक्षाओं एवं नियुक्तियों को रद करने का निर्णय लिया गया था। मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 15 सितंबर 2026 की तिथि निर्धारित की है। अब सबकी नजरें सरकार के उस हलफनामे पर टिकी हैं, जो इस कानूनी लड़ाई की अगली दिशा तय करेगा। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि अदालत से उन्हें स्थायी न्याय मिलेगा और उनकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी।
हाई कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु
| विषय | विवरण |
| राहत पाने वाले पद | सीजीएल (CGL) और सीडीपीओ (CDPO) अभ्यर्थी। |
| अदालत का आदेश | रद करने के सरकारी आदेश पर अंतरिम रोक। |
| अगली सुनवाई की तिथि | 15 सितंबर 2026 |
| सरकार की जिम्मेदारी | मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना। |
पीसीसीएफ नियुक्ति मामले पर भी हुई चर्चा
परीक्षाओं के अलावा, झारखंड हाई कोर्ट में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) की नियुक्ति से जुड़े विवाद पर भी सुनवाई हुई। इस मामले में अदालत ने टिप्पणी की कि चूंकि अभी तक इस पद पर कोई अंतिम नियुक्ति नहीं की गई है, इसलिए इस विषय पर विस्तार से चर्चा की आवश्यकता है। अदालत ने पीसीसीएफ नियुक्ति मामले की अगली सुनवाई के लिए सोमवार की तिथि तय की है।
अदालत की इन सक्रिय टिप्पणियों और रोक के आदेशों ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। विशेष रूप से सीजीएल और सीडीपीओ के अभ्यर्थी इस आदेश के बाद फिर से अपनी नियुक्ति और चयन की उम्मीद संजोने लगे हैं। 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है, जिसमें यह तय होगा कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा आयोजित इन परीक्षाओं का भविष्य क्या होगा। फिलहाल, अभ्यर्थियों के लिए राहत की बात यह है कि उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और न्यायपालिका ने इस पर विचार करने का निर्णय लिया है।
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