नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर संयुक्त राज्य अमेरिका के आयोग (USCIRF) ने अमेरिकी सरकार से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्यों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की सिफारिश की है। आयोग ने वाशिंगटन प्रशासन से आग्रह किया है कि वह संघ के सदस्यों को उच्च-स्तरीय बैठकों में आमंत्रित करने के बजाय उन पर प्रतिबंध लगाए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम की अपनी प्रस्तावित यात्रा शुरू करने वाले हैं।
यूएससीआईआरएफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से अपने अध्यक्ष और पाकिस्तानी-अमेरिकी डॉक्टर आसिफ महमूद तथा कमिश्नर जीन मिल्स के बयानों को साझा किया है। आसिफ महमूद ने आरएसएस को एक व्यापक संगठन बताते हुए आरोप लगाया है कि इससे जुड़े विभिन्न समूहों ने कथित तौर पर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। वहीं, कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि संघ के नेताओं को किसी भी प्रकार के राजनयिक शिष्टाचार या उच्च-स्तरीय बैठकों का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए, भले ही वे भारत सरकार के कामकाज से जुड़े हों।
प्रतिबंधों की मांग और पुरानी रिपोर्ट का हवाला
आयोग ने अमेरिकी सरकार से विशेष रूप से उन संघ सदस्यों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है, जिन्हें वे धर्म या विश्वास की आजादी के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार मानते हैं। यह पहली बार नहीं है जब इस एजेंसी ने इस तरह की मांग उठाई है। इससे पहले मार्च में जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भी आयोग ने धार्मिक आजादी के कथित उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए भारत की आलोचना की थी। उस समय भी यूएससीआईआरएफ ने आरएसएस और भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ (RAW) सहित कुछ विशिष्ट संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ लक्षित प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया था।
भारत सरकार ने पूर्व में ही आयोग की ऐसी रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है। नई दिल्ली की ओर से कहा गया था कि ये रिपोर्टें संदिग्ध स्रोतों और एक विशेष वैचारिक नैरेटिव पर आधारित होती हैं, जो देश की वास्तविक स्थिति को तोड़-मरोड़ कर और चयनात्मक तरीके से पेश करती हैं।
क्या है यूएससीआईआरएफ और मोहन भागवत की यात्रा का उद्देश्य
| यूएससीआईआरएफ की भूमिका | मोहन भागवत की तीन देशों की यात्रा |
| यह अमेरिकी संघीय सरकार की एक सलाहकार एजेंसी है। | यह यात्रा 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और यूके में शुरू होगी। |
| इसकी भूमिका केवल सरकार को सिफारिशें देने की है। | आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर यह दौरा आयोजित है। |
| अमेरिकी सरकार इसकी सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं है। | वे वहां भारतीय मूल के लोगों और स्थानीय संगठनों से संवाद करेंगे। |
आरएसएस प्रमुख की यह यात्रा भारतीय मूल के प्रवासियों और स्थानीय संघों के निमंत्रण पर आयोजित की जा रही है। चूंकि संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है, इसलिए इस दौरे के दौरान मोहन भागवत विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और प्रवासी भारतीयों के साथ बातचीत करेंगे।
आयोग की इन ताजा टिप्पणियों के बावजूद, अमेरिकी प्रशासन का आधिकारिक रुख इस पर क्या रहता है, यह देखने वाली बात होगी। यूएससीआईआरएफ की सिफारिशें अक्सर विवादों में रही हैं और भारत सरकार ने इसे बार-बार भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और पक्षपातपूर्ण रवैया करार दिया है। फिलहाल, संघ प्रमुख की यात्रा की तैयारियां जारी हैं और स्थानीय संगठनों ने उनके स्वागत के लिए विस्तृत कार्यक्रम तय किए हैं।
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