वाशिंगटन। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चंद्रमा की सतह पर एक नए और विशाल गड्ढे (क्रेटर) की खोज की है। यह गड्ढा इस महीने की शुरुआत में अंतरिक्ष अन्वेषण कंपनी स्पेसएक्स के एक रॉकेट की चंद्रमा से हुई टक्कर के कारण बना है। नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) ने इस घटना के बाद की उच्च-गुणवत्ता वाली तस्वीरें साझा की हैं, जो वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नासा के ऑर्बिटर ने 11 और 12 अगस्त के बीच इन तस्वीरों को कैद किया। यह क्रेटर 5 अगस्त को तब बना जब स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा अनियंत्रित होकर चंद्रमा की सतह से टकरा गया था। इस रॉकेट को जनवरी 2025 में फायरफ्लाई एयरोस्पेस के ‘ब्लू घोस्ट 1’ लूनर लैंडर मिशन के तहत अंतरिक्ष में भेजा गया था। हालांकि, यह सुखद रहा कि मिशन का लैंडर चंद्रमा पर सफलतापूर्वक और सुरक्षित तरीके से लैंड करने में कामयाब रहा था।
गड्ढे का आकार और स्वरूप
नासा के वैज्ञानिकों ने तस्वीरों में दिखने वाली परछाइयों की लंबाई और उनके घनत्व का बारीकी से अध्ययन किया है। इस विश्लेषण के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि रॉकेट की टक्कर से बना यह नया गड्ढा लगभग 60 फीट चौड़ा है। गहराई की बात करें तो यह सतह से 10 फीट से भी कम गहरा है। अंतरिक्ष विज्ञान में इस तरह की टक्करों से बनने वाले गड्ढे चंद्रमा की भूवैज्ञानिक संरचना को समझने में वैज्ञानिकों की मदद करते हैं।
तस्वीर खींचने की जटिल प्रक्रिया
नासा के लिए इस घटनाक्रम की सटीक तस्वीर लेना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं था। एजेंसी ने बताया कि जिस समय ऑर्बिटर ने यह फोटो ली, वह चंद्रमा की सतह से लगभग 60 मील की ऊंचाई पर उड़ान भर रहा था। इतनी ऊंचाई से एक विशिष्ट बिंदु पर कैमरा फोकस करना और अंतरिक्ष यान को सटीक कोण पर झुकाना एक बेहद चुनौतीपूर्ण तकनीकी कार्य था।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में समय का तालमेल सबसे बड़ी चुनौती थी। यदि कैमरा अपनी निर्धारित गणना से मात्र 10 सेकंड की भी देरी करता या पहले फोटो ले लेता, तो वह अपने लक्ष्य से लगभग 10 मील दूर निकल जाता और यह तस्वीर कभी नहीं मिल पाती।
वैज्ञानिक विश्लेषण और वैश्विक सहयोग
इन तस्वीरों के वैज्ञानिक विश्लेषण से चंद्रमा की सतह के नीचे छिपे रहस्यों के बारे में नए संकेत मिले हैं। गड्ढे के आसपास दो तरह की धारियां देखी गई हैं—चमकदार और गहरे रंग की। गहरे रंग की धारियां यह दर्शाती हैं कि सतह के करीब 1.5 फीट नीचे से धूल और चट्टानें उछलकर बाहर आई हैं। ये वे सामग्रियां हैं जो लंबे समय से सौर हवाओं और कॉस्मिक विकिरणों के प्रभाव में थीं। वहीं, चमकदार धारियां जमीन के भीतर से निकली बिल्कुल नई मिट्टी और सामग्री को दर्शाती हैं।
मिशन और क्रेटर से जुड़े मुख्य तथ्य
| विवरण | जानकारी |
| गड्ढे की चौड़ाई | लगभग 60 फीट |
| गड्ढे की गहराई | 10 फीट से कम |
| टकराव का कारण | स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट का हिस्सा |
| टकराव की तिथि | 5 अगस्त |
| फोटो लेने वाला यान | लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (NASA) |
इस क्रैश साइट का सटीक स्थान खोजने के लिए दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियों ने आपसी सहयोग का परिचय दिया। नासा के ‘सेंटर फॉर नियर अर्थ ऑब्जेक्ट स्टडीज’ ने पहले रॉकेट के संभावित पथ का सटीक गणितीय अनुमान लगाया। इसके बाद यह डेटा दक्षिण कोरियाई अंतरिक्ष एजेंसी को साझा किया गया। दक्षिण कोरिया के ‘दानूरी’ (KPLO) ऑर्बिटर ने 6 अगस्त को पहली बार इस जगह की पहचान की और इसके सटीक निर्देशांक नासा को भेजे। इसी अंतरराष्ट्रीय तालमेल के कारण नासा का LRO ऑर्बिटर इस ऐतिहासिक तस्वीर को लेने में सफल रहा।
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