Delhi: कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई कर रहे दो विशेष जजों का तबादला

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के असामान्य अनुरोध को दी मंजूरी

नई दिल्ली। दिल्ली में कोयला घोटाला से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई के लिए नियुक्त दो विशेष सत्र न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट ने उनके पद से हटा दिया है। यह कदम दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा किए गए एक विशेष और असामान्य अनुरोध के बाद उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस संबंध में आदेश पारित किया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने अनुरोध में कहा था कि विशेष सीबीआई न्यायाधीश सुनैना शर्मा और धीरज मोर को अन्य प्रशासनिक या न्यायिक जिम्मेदारियों के लिए मुक्त किया जाना आवश्यक है। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से सुप्रीम कोर्ट को भेजे गए पत्र में इन दोनों न्यायिक अधिकारियों को उत्कृष्ट योग्यता वाला बताया गया था। पत्र में उल्लेख किया गया कि हाई कोर्ट प्रशासन इनकी सेवाओं का उपयोग किसी अन्य महत्वपूर्ण स्थान पर करना चाहता है।

अल्प कार्यकाल के बाद ही हुआ तबादला
विशेष न्यायाधीश सुनैना शर्मा का इस पद पर कार्यकाल बेहद छोटा रहा। उन्होंने इसी साल जनवरी में इस विशेष अदालत का कार्यभार संभाला था। उनसे पहले संजय बंसल साढ़े चार साल तक इस पद पर रहे थे, जिन्हें कार्यमुक्त करने के बाद शर्मा की नियुक्ति की गई थी। इसी प्रकार, धीरज मोर को अप्रैल 2025 में विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। शर्मा को इस पद पर आए अभी मात्र छह महीने ही हुए थे और मोर का कार्यकाल भी सवा साल के करीब था, जब उनके तबादले का प्रस्ताव आया।

नए न्यायाधीशों ने संभाली कमान
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए नए जजों की नियुक्ति को भी मंजूरी दे दी है। साकेत कोर्ट में एनडीपीएस मामलों के विशेष न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार खर्ता अब सुनैना शर्मा का स्थान लेंगे। वहीं, तीस हजारी कोर्ट में फास्ट-ट्रैक अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय गर्ग को धीरज मोर की जगह तैनात किया गया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस संबंध में औपचारिक आदेश भी जारी कर दिए हैं। हालांकि, वर्तमान में सुनैना शर्मा और धीरज मोर को किसी नई अदालत में स्वतंत्र पोस्टिंग नहीं दी गई है। अधिसूचना के अनुसार, उन्हें फिलहाल प्रधान जिला और सीबीआई सत्र न्यायाधीश के कार्यालय के साथ संबद्ध (अटैच) कर दिया गया है।

सुरक्षित रखे गए फैसलों पर कड़े निर्देश
दिल्ली हाई कोर्ट ने कार्यमुक्त होने वाले दोनों न्यायाधीशों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे पद छोड़ने से पहले उन सभी मामलों की सूची तैयार करें जिनमें फैसले सुरक्षित रखे गए हैं। उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर या अधिकतम दो से तीन सप्ताह के अंदर इन फैसलों को सुनाना होगा। इन फैसलों की जानकारी पुरानी और नई दोनों अदालतों की कॉज लिस्ट और आधिकारिक वेबसाइट पर भी देनी अनिवार्य होगी।
कोयला घोटाला मामलों की वर्तमान स्थिति
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में कोयला घोटाले की दो विशेष अदालतों के समक्ष वर्तमान में सीबीआई द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के कुल 29 मामले लंबित हैं। इससे पहले की न्यायिक प्रक्रियाओं के दौरान करीब 27 से अधिक जटिल मामलों का निपटारा किया जा चुका है। नए जजों के सामने अब इन महत्वपूर्ण लंबित मामलों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की चुनौती होगी।

अदालती गलियारों में इन जजों के इतने छोटे कार्यकाल के बाद अचानक तबादले को लेकर चर्चाएं गर्म हैं, क्योंकि कोयला घोटाला जैसे संवेदनशील मामलों में सामान्यतः जजों को लंबे समय तक रखा जाता है ताकि केस की निरंतरता बनी रहे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की दलील को मानते हुए जनहित और प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर इस फेरबदल को स्वीकृति दे दी है।

 

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