Uttarakhand: देवभूमि उत्तराखंड बना दुनिया का आध्यात्मिक केंद्र चारधाम समेत प्रमुख मंदिरों में उमड़ा भक्तों का रिकॉर्ड सैलाब

देहरादून। उत्तराखंड विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में तेजी से अपने कदम बढ़ा रहा है। प्रदेश में संचालित चारधाम यात्रा के साथ-साथ अन्य प्रमुख पौराणिक और धार्मिक स्थलों पर दर्शन के लिए उमड़ रही श्रद्धालुओं की अपार भीड़ इस बात की पुष्टि करती है। चालू वर्ष की पहली छमाही के आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य के लगभग सभी प्रमुख मंदिरों में दर्शनार्थियों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार द्वारा तीर्थस्थलों के बुनियादी ढांचे और सड़क नेटवर्क में किए गए सुधारों के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं।


आंकड़ों में भारी उछाल: जागेश्वर और त्रियुगीनारायण में ढाई गुना बढ़े भक्त
उत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर धाम और रुद्रप्रयाग के त्रियुगीनारायण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में ढाई गुना की बढ़ोतरी हुई है। जागेश्वर धाम में इस वर्ष जून तक 1.74 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुँचे, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या केवल 67 हजार के करीब थी। इसी तरह, धारी देवी मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या दोगुनी होकर 5.42 लाख के पार पहुँच गई है। चम्पावत स्थित पूर्णागिरि धाम में भी डेढ़ गुना वृद्धि के साथ लगभग 21 लाख भक्तों ने शीश नवाया है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि अब श्रद्धालु केवल चारधाम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य पौराणिक स्थलों की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं।


यमुनोत्री और बद्रीनाथ धाम में टूटे पुराने कीर्तिमान
उत्तरकाशी जनपद में स्थित यमुनोत्री धाम की यात्रा अपनी भौगोलिक कठिनाइयों के लिए जानी जाती है, लेकिन इस वर्ष यहाँ भक्तों के उत्साह ने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। अगस्त की शुरुआत तक 6.54 लाख से अधिक यात्री माँ यमुना के दर्शन कर चुके हैं, जो धाम के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं, बद्रीनाथ धाम की यात्रा ने भी अपने शुरुआती 100 दिनों में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यहाँ इस अवधि में 15.52 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.11 लाख अधिक है। चारधाम यात्रा में अब तक कुल 45.84 लाख से अधिक श्रद्धालु अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं।


प्रधानमंत्री के दौरे के बाद आदि कैलाश यात्रा में आई क्रांति
पिथौरागढ़ जनपद में स्थित श्री आदि कैलाश धाम में श्रद्धालुओं की संख्या में जो उछाल आया है, वह अविस्मरणीय है। वर्ष 2022 से पहले यहाँ आने वाले यात्रियों की संख्या सालाना 2000 से भी कम रहती थी, लेकिन वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद यहाँ आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा है। इस वर्ष यात्रा शुरू होने के मात्र दो महीनों के भीतर ही 52,441 श्रद्धालु भोले के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। हालांकि वर्तमान में मानसून की संवेदनशीलता को देखते हुए यात्रा को अस्थाई विराम दिया गया है, लेकिन यह आंकड़ा आने वाले समय के लिए सुखद संकेत है।


कैंची धाम और ऋषिकेश क्षेत्र में उमड़ा पर्यटन का सैलाब
नैनीताल जिले में स्थित बाबा नीब करौरी महाराज का कैंची धाम वर्तमान में श्रद्धा का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। यहाँ जनवरी से जून तक 24.34 लाख से अधिक यात्री पहुँचे हैं, जिसमें अकेले जून माह में ही 8.66 लाख लोगों ने दर्शन किए। इसके अलावा, टिहरी जिले के ऋषिकेश से सटे मुनिकीरेती, तपोवन और शिवपुरी क्षेत्रों में भी सैलानियों की संख्या 16 लाख के करीब पहुँच गई है। कार्तिक स्वामी और सुरकंडा देवी जैसे मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिल रही है।


अवस्थापना विकास और आध्यात्मिक राजधानी का संकल्प
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड को दुनिया की आध्यात्मिक राजधानी बनाने का जो संकल्प लिया है, उसे साकार करने के लिए ‘मानसखण्ड मंदिरमाला मिशन’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं। सरकार का मुख्य फोकस कुमाऊं के पौराणिक मंदिरों को विकसित करना और उन्हें एक एकीकृत पर्यटन सर्किट से जोड़ना है। तीर्थस्थलों पर आधुनिक नागरिक सुविधाएं, सुगम परिवहन और चौड़ी सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। मुख्यमंत्री का मानना है कि जब बुनियादी सुविधाएं विश्वस्तरीय होंगी, तभी उत्तराखंड वैश्विक स्तर पर एक सशक्त आध्यात्मिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान और सुदृढ़ कर पाएगा।

 

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