चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन भारी हंगामे, तीखी बयानबाजी और राजनीतिक गतिरोध की भेंट चढ़ गया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य में हुए हालिया पेपर लीक मामलों को लेकर भगवंत मान सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी। विपक्ष ने शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में हुई अनियमितताओं के लिए सीधे तौर पर मंत्रियों को जिम्मेदार ठहराया और उनके इस्तीफे की मांग पर अड़ गया। हंगामे की स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा, लेकिन अंततः कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
काले पट्टे बांधकर सदन पहुँचे कांग्रेसी विधायक
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही कांग्रेस के तेवर कड़े नजर आए। पार्टी के विधायक हाथों और गले में काले पट्टे पहनकर विधानसभा परिसर पहुँचे और सरकार विरोधी नारेबाजी की। सदन के भीतर भी इसी विरोध का असर दिखाई दिया। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने फार्मेसी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पिछले साढ़े चार सालों में पंजाब में छह बार ऐसी घटनाएं हुई हैं। बाजवा के अनुसार, इनमें से पांच मामले शिक्षा विभाग और एक मामला स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा है। उन्होंने मांग की कि युवाओं के भविष्य के साथ हुए इस खिलवाड़ की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
प्रश्नकाल में चर्चा न होने पर विपक्ष का वॉकआउट
जब कांग्रेस ने इन गंभीर मुद्दों पर तत्काल विस्तृत चर्चा की मांग की, तो विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने नियमों का हवाला देते हुए इसे फिलहाल टाल दिया। स्पीकर ने स्पष्ट किया कि प्रश्नकाल का समय पहले से तय कार्यक्रमों के लिए आरक्षित है, इसलिए नियमों के विरुद्ध जाकर चर्चा की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने विपक्ष को आश्वासन दिया कि पूरे सत्र के दौरान इस विषय पर अपनी बात रखने के लिए उन्हें पर्याप्त समय मिलेगा। हालांकि, विपक्ष इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुआ और सदन के बीचों-बीच आकर नारेबाजी करने लगा। विरोध स्वरूप प्रताप सिंह बाजवा के नेतृत्व में पूरी कांग्रेस पार्टी ने सदन से वॉकआउट कर दिया और घोषणा की कि वे आज के पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार करेंगे।
सरकार का पलटवार और मंत्रियों की सफाई
विपक्ष के जाने के बाद सत्ता पक्ष के मंत्रियों ने मोर्चा संभाला। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वे पूरी तैयारी और तथ्यों के साथ सदन में आए थे, लेकिन कांग्रेस चर्चा से भाग रही है। बैंस ने कहा कि सरकार किसी भी जांच या सवाल से पीछे नहीं हट रही है। वहीं, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल राजनीतिक माहौल बनाने के लिए ड्रामा कर रहा है और उसे जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने भी कांग्रेस के रुख की निंदा की और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान बताया।
नीट पेपर लीक पर निंदा प्रस्ताव और अन्य मुद्दे
हंगामे के बीच सदन में केंद्र सरकार के खिलाफ ‘नीट पेपर लीक’ मामले को लेकर एक निंदा प्रस्ताव भी पेश किया गया। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस प्रस्ताव को रखते हुए देश की परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल सुधार की मांग की। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ हुई सख्ती निंदनीय है। इसके अलावा, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान ‘मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना’ के तहत मोतियाबिंद के इलाज का मुद्दा भी उठा। स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने सदन को जानकारी दी कि इस योजना में मोतियाबिंद का इलाज पहले से शामिल है और पात्र लोग सरकारी के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी निःशुल्क लाभ उठा सकते हैं। सत्र के दौरान जसवंत सिंह खालड़ा से जुड़े विषय पर भी संक्षिप्त चर्चा हुई।
Pls read:Punjab: पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में पेपर लीक पर संग्राम हरपाल चीमा ने कांग्रेस पर कसा तीखा तंज