शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में आगामी दिनों में भारी हलचल देखने को मिलने वाली है। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने प्रदेश विधानसभा के आगामी मानसून सत्र के आयोजन को अपनी आधिकारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। अधिसूचना के अनुसार, सत्र का आगाज 21 अगस्त को सुबह 11 बजे से होगा। यह हिमाचल प्रदेश की 14वीं विधानसभा का 12वां सत्र होगा। इस सत्र के दौरान प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होने की पूरी संभावना है, क्योंकि दोनों ही दल अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ सदन में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
आपदा और एफआईआर के मुद्दे पर सदन में हंगामे के आसार
मानसून सत्र के दौरान प्रदेश में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा और उससे हुए भारी नुकसान का मुद्दा सबसे प्रमुख रहने वाला है। विपक्ष आपदा राहत कार्यों में कथित ढिलाई को लेकर सरकार को घेरने की योजना बना रहा है। इसके अलावा, भाजपा नेताओं और विधायकों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकियों (FIR) का मामला भी सदन की तपिश बढ़ा सकता है। भाजपा का स्पष्ट आरोप है कि सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार राजनीतिक द्वेष की भावना से उनके नेताओं पर कार्रवाई कर रही है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष ने भी इन आरोपों का जवाब देने के लिए पूरी तैयारी कर ली है और वे कानून-व्यवस्था के नाम पर अपना बचाव करेंगे।
सत्र से पहले मंत्रिमंडल में फेरबदल की सुगबुगाहट
राजनीतिक गलियारों में इस बात की प्रबल चर्चा है कि मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू अपने मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव कर सकते हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार ने नई दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की है। इस बैठक में सरकार और संगठन के कामकाज की समीक्षा के साथ-साथ कैबिनेट विस्तार पर भी मंथन हुआ है। सूत्रों का मानना है कि क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने के लिए कुछ नए चेहरों को जगह दी जा सकती है। इसके साथ ही, लंबे समय से रिक्त चल रहे विधानसभा उपाध्यक्ष के पद पर भी किसी वरिष्ठ नेता की तैनाती की जा सकती है।
प्रशासनिक तैयारियां और सूचनाओं का आदान-प्रदान
विधानसभा सचिवालय ने सत्र के सफल संचालन के लिए अपनी प्रशासनिक तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। विधानसभा सचिव यशपाल शर्मा ने सत्र के आयोजन संबंधी अधिसूचना की प्रतियां सभी संबंधित पक्षों को भेज दी हैं। इनमें प्रदेश के सभी विधायक, हिमाचल से जुड़े लोकसभा और राज्यसभा सांसद, मुख्य सचिव और भारत निर्वाचन आयोग शामिल हैं। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी विभागों को भी सूचित कर दिया गया है ताकि वे सत्र के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्नों और चर्चाओं के लिए आवश्यक डेटा और जानकारी तैयार रख सकें।
जनहित के मुद्दों और विधायी कार्यों पर रहेगी नजर
मानसून सत्र न केवल राजनीतिक संघर्ष का केंद्र होगा, बल्कि इसमें कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को भी अंजाम दिया जाएगा। सरकार कई नए विधेयक पेश करने और पुराने कानूनों में संशोधन करने की तैयारी में है। जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सदन में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और सड़कों की खस्ताहाल स्थिति जैसे बुनियादी मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो पाएगी या नहीं। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वे जनहित के मुद्दों पर सरकार से सीधी जवाबदेही मांगेंगे। 21 अगस्त से शुरू होने वाला यह सत्र हिमाचल की भविष्य की राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।