इस्लामाबाद। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बार फिर अपनी भड़काऊ बयानबाजी से आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने पीओके में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई हिंसक कार्रवाई का बचाव करते हुए एक शर्मनाक बयान दिया। आसिफ ने कहा कि इस्लामाबाद की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले और सड़कों पर उतरने वाले लोग उनके लिए वैसे ही दुश्मन हैं जैसे कि भारत। उनके इस बयान ने क्षेत्र में पहले से ही व्याप्त तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है।
प्रदर्शनकारियों की तुलना भारत से और बातचीत से इनकार
एक स्थानीय टीवी चैनल के साथ बातचीत करते हुए ख्वाजा आसिफ ने सरकार के कठोर कदमों को जायज ठहराया। उन्होंने पीओके के नागरिकों और पाकिस्तान के पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी भारत के बीच कोई अंतर नहीं किया। आसिफ ने सीधे तौर पर कहा कि वे इन प्रदर्शनकारियों को ‘भारत’ की श्रेणी में रखते हैं और उन्हें पाकिस्तान का दुश्मन मानते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान सरकार इन प्रदर्शनकारियों के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत करने का इरादा नहीं रखती है। रक्षा मंत्री के इस रुख से साफ है कि सरकार लोकतांत्रिक तरीके से समाधान ढूंढने के बजाय बल प्रयोग को प्राथमिकता दे रही है।
सुरक्षा बलों की फायरिंग में 20 कार्यकर्ताओं की मौत
ख्वाजा आसिफ की यह टिप्पणी उस समय आई है जब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सुरक्षा बलों की बर्बरता की खबरें चरम पर हैं। हाल ही में प्रतिबंधित संगठन ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) के नेतृत्व में निकाले जा रहे एक विरोध मार्च पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस हिंसक कार्रवाई में कम से कम 20 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसे हाल के वर्षों में पीओके के इतिहास की सबसे घातक और खूनी सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सबका ध्यान खींचा है।
आरक्षित सीटों को लेकर भड़का है जन आक्रोश
जेएएसी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन की मुख्य जड़ें वहां की राजनीतिक व्यवस्था में छिपी हैं। हजारों समर्थकों ने रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक मार्च निकालकर कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को खत्म करने की मांग की। प्रदर्शनकारी संगठन का मानना है कि आरक्षित सीटों की यह व्यवस्था पीओके के मूल निवासियों के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है। उनका आरोप है कि इस्लामाबाद में बैठी राजनीतिक पार्टियां इन सीटों का दुरुपयोग कर पीओके की सत्ता में हेरफेर करती हैं और वहां की स्थानीय सरकार बनाने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।
शांतिपूर्ण मार्च और दमन की कहानी
संगठन के नेताओं का कहना है कि वे केवल अपने हक की बात कर रहे हैं। उनका तर्क है कि केवल पीओके में रहने वाले लोगों को ही अपनी विधानसभा चुनने का पूरा अधिकार होना चाहिए। जेएएसी के अनुसार, मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ रहे लगभग 5,000 लोग शांतिपूर्ण मार्च का हिस्सा थे। आरोप है कि बिना किसी उकसावे या चेतावनी के पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों ने निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसा दीं। जहां एक ओर प्रदर्शनकारी इसे अपने अस्तित्व की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का उन्हें ‘दुश्मन’ बताना पाकिस्तान सरकार की दमनकारी मानसिकता को उजागर करता है। क्षेत्र में फिलहाल स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है।
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