चंडीगढ़। पंजाब सरकार द्वारा संचालित ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे प्रदेश के हजारों परिवारों के लिए एक बड़ा सहारा बनकर उभरी है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने अब तक इस योजना के तहत 8,069 कैंसर मरीजों के कैशलेस इलाज पर 20.22 करोड़ रुपये की राशि खर्च की है। यह योजना उन परिवारों के लिए संजीवनी साबित हो रही है, जिन्हें इलाज के भारी-भरकम खर्च के कारण उपचार में देरी करनी पड़ती थी।
जून में हुआ रिकॉर्ड संख्या में मरीजों का उपचार
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 18 जुलाई 2026 तक योजना के तहत कैंसर के उपचार में लगातार वृद्धि देखी गई है। साल की शुरुआत से ही मरीजों की संख्या बढ़ती रही; जनवरी में 842 मरीजों का इलाज हुआ, जो जून में अपने उच्चतम स्तर 1,468 तक पहुंच गया। जुलाई के शुरुआती 18 दिनों में ही 879 मरीजों ने इस योजना का लाभ उठाया है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य में कैंसर के उपचार की आवश्यकता कितनी अधिक है और सरकार किस प्रकार तत्परता से इसे पूरा कर रही है।
कार्यशील आयु वर्ग के मरीजों पर कैंसर का बड़ा हमला
एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि कैंसर अब केवल वृद्धावस्था की बीमारी नहीं रह गई है। आंकड़ों के अनुसार, कुल लाभार्थियों में से आधे से अधिक मरीज (4,285) 36 से 60 वर्ष की कार्यशील आयु वर्ग के हैं। इसके अलावा, 60 वर्ष से अधिक आयु के 3,376 मरीज, 17 से 35 वर्ष के 399 मरीज और 17 वर्ष से कम उम्र के 9 बच्चों का भी इस योजना के तहत उपचार किया गया। यह वर्ग वह है जो अक्सर अपने परिवारों का मुख्य आर्थिक आधार होता है, और उनके बीमार होने से पूरे परिवार पर संकट आ जाता है।
कैशलेस इलाज से दूर हुई आर्थिक बाधा
कैंसर का इलाज सामान्यतः काफी महंगा होता है, जिसमें सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी जैसी आधुनिक पद्धतियों का खर्च 4 से 5 लाख रुपये तक जा सकता है। समाना की निवासी दर्शन देवी जैसी कई महिलाएं इस योजना की सफलता का प्रमाण हैं। दर्शन देवी को जब सर्जरी की जरूरत थी, तो खर्च का अनुमान सुनकर परिवार घबरा गया था, लेकिन मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत उन्हें बिना किसी व्यक्तिगत खर्च के नया जीवन मिला। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मरीज का इलाज केवल पैसों की कमी के कारण न रुके।
आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों तक आसान पहुंच
आज के समय में इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी जैसी नई तकनीकों ने कैंसर से स्वस्थ होने की संभावनाओं को काफी बढ़ा दिया है। हालांकि, ये सुविधाएं महंगी होने के कारण आम आदमी की पहुंच से बाहर थीं। पंजाब सरकार की इस योजना ने मरीजों और इन आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के बीच की दूरी को खत्म कर दिया है। राज्य सरकार का मानना है कि समय पर उपचार मिलना हर नागरिक का अधिकार है और वह कैंसर के विरुद्ध इस जंग में हर जरूरतमंद परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है।
परिवारों को मिल रही बड़ी राहत
कैंसर न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और आर्थिक रूप से भी परिवारों को तोड़ देता है। बार-बार अस्पताल जाने और लंबी देखभाल की जरूरतों के बीच मुख्यमंत्री सेहत योजना ने एक बड़ा आर्थिक सुरक्षा कवच प्रदान किया है। एसएचए पंजाब के अधिकारियों का कहना है कि वे इस योजना को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को भी समय पर उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। सरकार की इस पहल से न केवल मृत्यु दर में कमी आएगी, बल्कि कैंसर मुक्त पंजाब के सपने को भी बल मिलेगा।