Delhi: युवा प्रदर्शनकारियों पर न हो कानूनी कार्रवाई तभी खत्म होगा अनशन सोनम वांगचुक ने सरकार के सामने रखी शर्तें

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को एक औपचारिक पत्र लिखकर अपना अनशन समाप्त करने के संकेत दिए हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अपना अनशन तभी तोड़ेंगे जब सरकार उनकी कुछ अनिवार्य शर्तों को स्वीकार कर लेगी। जे. पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को संबोधित इस पत्र में वांगचुक ने मुख्य रूप से उन युवाओं की सुरक्षा की मांग की है जो इस आंदोलन का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वह लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए युवाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाए।


युवाओं पर दंडात्मक कार्रवाई न करने का आश्वासन
सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में सरकार से यह स्पष्ट आश्वासन मांगा है कि इस आंदोलन में शामिल होने वाले किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ भविष्य में कोई दंडात्मक या बदले की भावना से कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने लिखा कि इन युवाओं का एकमात्र उद्देश्य देश की शिक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और जवाबदेह बनाना रहा है। वांगचुक ने चिंता जताई कि यदि सरकार ने युवाओं का उत्पीड़न किया, तो यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति उनके भरोसे को कमजोर करेगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार यह भरोसा दिलाती है, तो वे लाखों युवाओं की आकांक्षाओं को समझते हुए अपना अनशन समाप्त कर देंगे।


मुआवजे और जवाबदेही पर सार्थक चर्चा की मांग
पत्र में वांगचुक ने उन महत्वपूर्ण बिंदुओं को भी दोहराया जिन पर अस्पताल में मुलाकात के दौरान चर्चा हुई थी। उन्होंने मांग की कि नीट परीक्षा के पेपर लीक होने के कारण मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को सरकार उचित आर्थिक सहायता और मुआवजा प्रदान करे। इसके अलावा, उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के लिए संसद में एक गंभीर चर्चा की मांग की है। वांगचुक ने सुझाव दिया है कि सरकार को वर्तमान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसे कड़े कदमों पर भी विचार करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।


अनिश्चितकालीन अनशन की चेतावनी
सोनम वांगचुक ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर स्पष्ट और लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो वे अपना अनशन अनिश्चित काल तक जारी रखने के लिए विवश होंगे। उन्होंने 20 जुलाई के ‘चलो संसद’ मार्च का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने असाधारण धैर्य दिखाया और मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस शांतिपूर्ण विरोध के बाद अब और अधिक पुलिस बल का प्रयोग कर आंदोलन को दबाने की कोशिश नहीं करेगी।


सांसदों की अपील और वांगचुक का संकल्प
सोनम वांगचुक ने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उनसे अनशन खत्म करने का अनुरोध किया है। सांसदों ने उन्हें याद दिलाया कि देश की सेवा और शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए अभी उनका स्वस्थ रहना आवश्यक है। वांगचुक ने कहा कि वे भी अपने छात्रों और शिक्षा के क्षेत्र में वापस लौटना चाहते हैं क्योंकि यही उनके जीवन की पहचान है, लेकिन वे उन युवाओं को अधर में छोड़कर नहीं जा सकते जिनकी खातिर यह संघर्ष शुरू हुआ है। उन्होंने अंत में लिखा कि लोकतंत्र का भविष्य इस बात पर टिका है कि वह अपने उन युवा नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है जो साहस के साथ सच बोलने की हिम्मत दिखाते हैं।

 

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