मुंबई। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले विवादित परिसीमन बिल को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) की ओर से इस बिल को लेकर पहली बार कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। पार्टी की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने बुधवार को स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार राज्यों में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि करने का लिखित भरोसा देती है, तो उनकी पार्टी इस बिल पर समर्थन देने के लिए चर्चा कर सकती है।
उल्लेखनीय है कि यह विवादित बिल इसी साल अप्रैल में संसद में दो-तिहाई बहुमत की कमी के कारण गिर गया था। अब सरकार इसे नए संशोधनों के साथ दोबारा पेश करने की तैयारी में है। सुप्रिया सुले ने बताया कि इस विषय पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में उन्होंने हिस्सा लिया था, जहाँ गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। सुले का दावा है कि सरकार के पास प्रत्येक राज्य के लिए सीटों में 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का एक प्रस्ताव है, जिसे वे अध्ययन के बाद ही अंतिम रूप देंगे।
दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंता और 50 प्रतिशत फॉर्मूला
सुप्रिया सुले ने परिसीमन को लेकर एक महत्वपूर्ण तकनीकी और भौगोलिक पक्ष भी रखा। उन्होंने कहा कि यदि सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो यह दक्षिणी राज्यों के साथ घोर अन्याय होगा क्योंकि उन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में बेहतर कार्य किया है। सुले के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह और किरेन रिजिजू ने इस चिंता को दूर करने के लिए हर राज्य में सीटों को समान रूप से 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, सुले ने यह भी साफ किया कि जब तक बिल का आधिकारिक मसौदा उनके हाथ में नहीं आता, तब तक वे इस पर कोई ठोस घोषणा नहीं करेंगी।
एनडीए में शामिल होने की अटकलों पर विराम
एनसीपी (शरद पवार) के एनडीए में शामिल होने और परिसीमन बिल के बदले गठबंधन में जाने की उड़ रही अफवाहों पर सुप्रिया सुले ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने इन सभी खबरों को आधारहीन बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। सुले ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एनसीपी (एसपी) मजबूती से ‘इंडी’ (I.N.D.I.A.) गठबंधन के साथ खड़ी है और उनके किसी अन्य खेमे में जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने कहा कि सूत्रों के हवाले से चलाई जा रही खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं।
राजनीतिक घेराबंदी और मानसून सत्र की तैयारी
परिसीमन बिल को लेकर सुप्रिया सुले का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भाजपा पर विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप लगाया है। चिदंबरम ने दावा किया है कि सरकार 131वें संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए एनसीपी और डीएमके जैसी क्षेत्रीय पार्टियों को अपने पाले में लाने की जुगत में है। उन्होंने इन दलों से अपील की है कि वे सरकार के झांसे में न आएं और बिल का विरोध करें। ऐसे में सुले का ‘शर्तों के साथ समर्थन’ वाला बयान मानसून सत्र में एक नई राजनीतिक जंग की ओर इशारा कर रहा है।
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