शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के बागवानी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। साल 2026 से 2031 तक चलने वाले ‘हाई वैल्यू नट मिशन’ के माध्यम से प्रदेश में अखरोट, बादाम, खुबानी और चिलगोजा (नियोजा) जैसे उच्च मूल्य वाले मेवों की खेती को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस मिशन का रोडमैप साझा करते हुए बताया कि यह पहल बागवानी क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन के एक नए युग की शुरुआत करेगी।
वर्तमान में हिमाचल के बागवानी क्षेत्र के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनमें पुराने हो चुके बगीचे, कम उत्पादकता, फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे का अभाव और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) के सीमित अवसर शामिल हैं। हाई वैल्यू नट मिशन का मुख्य उद्देश्य इन सभी बाधाओं को दूर कर एक ऐसा मजबूत तंत्र विकसित करना है जो बागवानों को बेहतर बाजार पहुंच और आधुनिक सुविधाएं प्रदान कर सके।
बगीचों का कायाकल्प और सघन बागवानी
इस मिशन के तहत लगभग 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। योजना के अनुसार, 900 हेक्टेयर में फैले पुराने और कम पैदावार देने वाले बगीचों का वैज्ञानिक तरीके से कायाकल्प किया जाएगा। इसमें पेड़ों की छंटनी (कैनोपी मैनेजमेंट), टॉप-वर्किंग, पुराने पेड़ों को बदलने और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे। साथ ही, बेहतर जल प्रबंधन के जरिए सिंचाई की सुविधाओं को सुधारा जाएगा। इसके अलावा, 100 हेक्टेयर भूमि पर ‘मॉडल हाई-डेंसिटी प्लांटेशन’ (सघन बागवानी) विकसित की जाएगी। ये बाग उच्च गुणवत्ता वाली पौध, सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों और जलवायु-अनुकूल खेती की आधुनिक तकनीकों से लैस होंगे।
बुनियादी ढांचा और नर्सरी का विकास
बागवानों को रोगमुक्त और प्रमाणित पौध उपलब्ध कराने के लिए सरकार राज्य के प्रमुख मेवा उत्पादक क्षेत्रों में चार हाई-टेक नर्सरी और दो उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस) स्थापित करेगी। ये केंद्र केवल पौध तैयार करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यहाँ शोध, प्रशिक्षण और आधुनिक खेती के प्रदर्शन की सुविधाएं भी होंगी। इससे बागवानों को उन्नत प्रबंधन तकनीकों को सीखने और उन्हें अपने खेतों में लागू करने में मदद मिलेगी।
प्रसंस्करण और मार्केटिंग पर जोर
उत्पादों की बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए मिशन के तहत 10 आधुनिक इकाइयां स्थापित करने की योजना है। ये इकाइयां मेवों के संकलन, ग्रेडिंग, छंटाई, पैकेजिंग और प्रसंस्करण का कार्य करेंगी। इससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी और उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर होगी। सरकार किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को बढ़ावा देने के साथ-साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करेगी।
जनजातीय क्षेत्रों में चिलगोजा का संरक्षण
पारिस्थितिक और आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण चिलगोजा (नियोजा) के संरक्षण के लिए मिशन के तहत विशेष प्राथमिकता दी गई है। जनजातीय क्षेत्रों में चिलगोजा के जंगलों का प्राकृतिक पुनर्जनन करने और इसके बीजों के अंकुरण के लिए विशेष सुविधाएं तैयार की जाएंगी। इससे जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के स्थायी अवसर पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मेवों की खेती की अपार संभावनाएं हैं। हाई वैल्यू नट मिशन के माध्यम से न केवल उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि मूल्य संवर्धन, बेहतर ब्रांडिंग और निर्यात प्रोत्साहन से बागवानों को उनके उत्पादों का सही मूल्य मिलेगा, जिससे अंततः ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
हाई वैल्यू नट मिशन के मुख्य लक्ष्य
हिमाचल प्रदेश सरकार का यह पांच वर्षीय मिशन बागवानी के क्षेत्र में तकनीक और आर्थिकी का समन्वय है। इसके प्रमुख बिंदुओं में 900 हेक्टेयर पुराने बगीचों का वैज्ञानिक सुधार, चार हाई-टेक नर्सरी की स्थापना और 10 आधुनिक प्रोसेसिंग इकाइयों का निर्माण शामिल है। योजना के तहत महिलाओं, जनजातीय समुदायों और किसान उत्पादक संगठनों को विशेष सहयोग दिया जाएगा। मिशन का मुख्य ध्यान बादाम, अखरोट और चिलगोजा जैसे मेवों की ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देना है ताकि बागवानों की लाभप्रदता बढ़ाई जा सके। इससे राज्य की बागवानी वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार होगी।
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