Punjab: पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खत्म करने की कवायद बैठक से पहले चन्नी ने दलित प्रतिनिधित्व का मुद्दा उछाला

चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से जारी आंतरिक कलह और गुटबाजी को समाप्त करने के लिए प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल की कोशिशें अब रंग लाती दिख रही हैं। शनिवार को होने वाली कांग्रेस की बैठक को राज्य की राजनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें दोनों धड़ों के बीच आधिकारिक तौर पर सुलह की घोषणा होने की प्रबल संभावना है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पार्टी के भीतर एकजुटता दिखाना है ताकि आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना मिलकर किया जा सके।

हालांकि, इस सुलह की घोषणा से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने अपनी रणनीति के जरिए कांग्रेस हाईकमान तक एक कड़ा संदेश भेजने का प्रयास किया है। चन्नी ने पंजाब की राजनीति में दलित समुदाय के बड़े प्रभाव और उनके उचित प्रतिनिधित्व का मुद्दा फिर से गर्मा दिया है। गौरतलब है कि पंजाब में लगभग 34 प्रतिशत आबादी दलित भाईचारे की है। चन्नी ने तर्क दिया है कि इतने बड़े वर्ग को पार्टी और सरकार में उनकी संख्या के अनुपात में सम्मान और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

अपनी इस मुहिम को मजबूती देने के लिए चन्नी ने शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री बूटा सिंह के परिवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद बूटा सिंह के परिजनों ने स्पष्ट किया कि उनका पूरा समर्थन चन्नी के साथ है। उन्होंने यह भी इच्छा जताई कि कांग्रेस पार्टी चन्नी को और अधिक मजबूती प्रदान करे ताकि वे समाज के वंचित वर्गों की आवाज उठा सकें। चन्नी की इस सक्रियता को पार्टी के भीतर एक दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिससे वे यह स्पष्ट कर रहे हैं कि वे कांग्रेस के भीतर रहकर ही अपने अधिकारों और समाज के हितों के लिए संघर्ष करेंगे।

पंजाब कांग्रेस में इस विवाद की मुख्य जड़ तरनतारन उपचुनाव के दौरान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग द्वारा दिया गया एक विवादास्पद बयान माना जाता है। वड़िंग के उस बयान के बाद दलित समुदाय से जुड़े कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता नाराज हो गए थे और उन्होंने सीधे तौर पर प्रदेश नेतृत्व को निशाने पर लिया था। इस नाराजगी ने पार्टी के भीतर दो गुट बना दिए थे, जिसे सुलझाना अब भूपेश बघेल के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

इस राजनीतिक गतिरोध को दूर करने में लोकसभा सदस्य सुखजिंदर सिंह रंधावा और विधायक परगट सिंह की भूमिका काफी अहम रही है। रंधावा ने अपने पुराने मतभेदों को किनारे रखकर विधायक राणा गुरजीत सिंह से मुलाकात की और उन्हें इस सुलह प्रक्रिया में सहयोग के लिए राजी किया। रंधावा और परगट सिंह को दिल्ली स्थित आलाकमान से भी लगातार निर्देश मिल रहे हैं। चूंकि ये दोनों नेता अन्य राज्यों में भी पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं, इसलिए पंजाब की इस कलह को खत्म करने का जिम्मा उन पर और बढ़ गया है। शनिवार को होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक के लिए अब सभी नेता राणा गुरजीत सिंह के आवास पर जुटने के लिए सहमत हो गए हैं, जहाँ भूपेश बघेल की मौजूदगी में पार्टी की भावी रणनीति और एकता पर मुहर लग सकती है।

 

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