शिमला। हिमाचल प्रदेश को देश का अग्रणी प्राकृतिक खेती राज्य बनाने के लिए सरकार ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। कृषि विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल को प्राकृतिक खेती में देश का नंबर वन राज्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कृषि विभाग को निर्देश दिए कि इस दिशा में पूरी बारीकी और संजीदगी से कार्य किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक रूप से उगाए गए उत्पादों को उचित बाजार उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग में एक अलग ‘मार्केटिंग विंग’ की स्थापना की जाए। यह विंग न केवल स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध कराएगा, बल्कि इन उत्पादों को डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से वैश्विक स्तर पर बेचने की संभावनाएं भी तलाशेगा। उन्होंने विभाग को आश्वासन दिया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बजट और अन्य संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
खेती की ओर लौट रहे हैं किसान
आंकड़ों का जिक्र करते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 2,56,870 किसान लगभग 44,784 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं। सरकार की नई नीतियों के कारण यह संख्या लगातार बढ़ रही है। सबसे उत्साहजनक बात यह है कि जो किसान पहले खेती छोड़ चुके थे, वे भी अब प्राकृतिक खेती के लाभों को देखते हुए वापस कृषि क्षेत्र में अपनी रुचि दिखा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने प्राकृतिक रूप से उगाई गई फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणा की है।
प्राकृतिक फसलों के लिए निर्धारित नई एमएसपी दरें
सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्राकृतिक उत्पादों के मूल्यों में ऐतिहासिक वृद्धि की है, जिसका विवरण इस प्रकार है:
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गेहूं: 80 रुपये प्रति किलोग्राम
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मक्का: 50 रुपये प्रति किलोग्राम
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कच्ची हल्दी: 150 रुपये प्रति किलोग्राम
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पांगी घाटी का जौ: 80 रुपये प्रति किलोग्राम
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अदरक: 30 रुपये प्रति किलोग्राम
डेयरी क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। गाय के दूध का एमएसपी 32 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का एमएसपी 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसका उद्देश्य छोटे और सीमांत डेयरी किसानों को सीधा लाभ पहुंचाना है। पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान राज्य के दूध उत्पादकों के बीच 300 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है।
बड़ा भंगाल बनेगा प्राकृतिक पंचायत
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को निर्देश दिए कि कांगड़ा जिले के बड़ा भंगाल क्षेत्र को ‘प्राकृतिक पंचायत’ घोषित करने के लिए सभी आवश्यक औपचारिकताओं को जल्द पूरा किया जाए। इसके साथ ही बड़ा भंगाल क्षेत्र में उगने वाले प्रसिद्ध ‘राजमा’ के लिए जीआई टैग (भौगोलिक संकेत) प्राप्त करने के लिए भी आवेदन प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।
सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दोहराया कि किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक में कृषि मंत्री चंद्र कुमार, सचिव कृषि सी. पॉलरासु, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंघमार और राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध निदेशक राम कुमार गौतम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।