कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कांगड़ा जिले के अत्यंत दुर्गम और जनजातीय क्षेत्र बड़ा बंगाल का दौरा किया। हाल ही में आई प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुए नुकसान का जायजा लेने पहुंचे मुख्यमंत्री ने स्थानीय निवासियों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं को गहराई से सुना। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि क्षेत्र के लोगों की शिकायतों का निवारण प्राथमिकता के आधार पर और समयबद्ध तरीके से किया जाए।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और वहां चल रहे राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। बड़ा बंगाल को सड़क मार्ग से जोड़ने की अनिवार्यता पर जोर देते हुए उन्होंने ₹10 करोड़ की धनराशि जारी करने की घोषणा की। निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक अनूठी रणनीति सुझाई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित सड़क के प्रत्येक किलोमीटर के लिए अलग-अलग निविदाएं (टेंडर) आमंत्रित की जाएं ताकि निर्माण की गति बढ़ सके। साथ ही, उन्होंने दुर्गम क्षेत्र होने के कारण निर्माण मशीनरी को हवाई मार्ग से वहां पहुंचाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
बिजली और संचार व्यवस्था पर विशेष ध्यान
क्षेत्र में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बिजली बोर्ड को निर्देश दिए कि ऊपरी और निचले बड़ा बंगाल के लिए एक-एक डीजल जनरेटर उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने घरों की आंतरिक वायरिंग और नए कनेक्शन के लिए तत्काल सर्वेक्षण करने को भी कहा। मुख्यमंत्री ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई जलविद्युत परियोजना को पुनर्जीवित करने और क्षेत्र में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना पर भी बल दिया। मोबाइल कनेक्टिविटी की मांग पर उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार निजी टेलीकॉम कंपनियों से बात कर जल्द ही क्षेत्र में मोबाइल सेवाएं शुरू कराएगी।
आर्थिकी और कृषि को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रसिद्ध ‘बड़ा बंगाल राजमा’ की एक विशिष्ट ब्रांड पहचान विकसित की जाए ताकि बाजार में इसकी बेहतर कीमत मिल सके। उन्होंने ग्रामीणों को अखरोट और शाहबलूत (चेस्टनट) के पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की और कहा कि सरकार द्वारा दिए जा रहे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ उठाएं।
शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए क्रांतिकारी कदम
बड़ा बंगाल के छात्रों के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि प्रत्येक शैक्षणिक सत्र की शुरुआत और अंत में छात्रों के लिए ‘हेलीकॉप्टर टैक्सी’ सेवा प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, क्षेत्र के बच्चों के लिए विशेष छात्रावास के निर्माण और सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में उनके प्रवेश की व्यवस्था भी की जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय निवासियों को प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि आपात स्थिति में वे समुदाय के भीतर ही चिकित्सा सहायता उपलब्ध करा सकें।
बड़ा बंगाल के लिए मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाएं
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सड़क निर्माण: ₹10 करोड़ का बजट आवंटित, हर किलोमीटर के लिए अलग टेंडर की व्यवस्था।
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बिजली आपूर्ति: ऊपरी और निचले क्षेत्र के लिए डीजल जनरेटर और सौर ऊर्जा पर जोर।
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शिक्षा सहायता: छात्रों के लिए हेलीकॉप्टर टैक्सी सेवा और विशेष छात्रावास।
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सामाजिक सुरक्षा: पात्र महिलाओं को ‘इंदिरा गांधी सुख सम्मान निधि योजना’ के तहत ₹1,500 मासिक पेंशन।
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वित्तीय सहायता: दो महिला मंडलों को ₹2-2 लाख और युवक मंडल को ₹1 लाख की मदद।
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विशेष दर्जा: क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने और प्राकृतिक खेती पंचायत घोषित करने का प्रयास।
मुख्यमंत्री ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि वे यहां किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि लोगों की कठिनाइयों को समझने और उन्हें साझा करने आए हैं। उन्होंने कहा कि शिमला में बैठकर नीतियां बनाना आसान है, लेकिन धरातल की चुनौतियों को वहां जाकर ही समझा जा सकता है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विश्वास दिलाया कि विकास की किरण राज्य के सबसे अंतिम कोने तक पहुंचेगी। उन्होंने स्थानीय राशन डिपो में खाद्यान्न का कोटा बढ़ाने और बाढ़ से सुरक्षा के लिए तटबंधों के निर्माण की संभावना तलाशने का भी आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री के इस दौरे से सुदूरवर्ती बड़ा बंगाल के निवासियों में विकास की नई उम्मीद जगी है।
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