Delhi: अब देश भर में तेजी से लागू होगी ई जीरो एफआईआर

नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने अब सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 52वीं प्रगति (PRAGATI) बैठक की अध्यक्षता करते हुए डिजिटल सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि साइबर ठगी के शिकार होने वाले नागरिकों को तत्काल राहत देने और अपराधियों तक जल्द पहुंचने के लिए देश भर में ‘ई-जीरो एफआईआर’ (e-Zero FIR) की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य एजेंडा देश की डिजिटल सुरक्षा को अभेद्य बनाना और साइबर अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करना था। नरेंद्र मोदी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रत्येक राज्य के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) के साथ इस विषय पर गहन चर्चा करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि ई-जीरो एफआईआर की प्रक्रिया को देश के कोने-कोने में इतनी तेजी से विकसित किया जाए कि पीड़ित व्यक्ति को न्याय के लिए भटकना न पड़े।

अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जरूरत
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने साइबर अपराध और हाल के दिनों में चर्चा में रहे ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ (Digital Arrest) जैसे मामलों की गंभीरता से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों में सुराग बहुत जल्दी मिट जाते हैं, इसलिए जांच में होने वाली एक मिनट की देरी भी अपराधी को बचने का मौका दे सकती है। ई-जीरो एफआईआर एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत किसी भी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, चाहे अपराध किसी भी क्षेत्र में हुआ हो। इससे जांचकर्ताओं को तुरंत कार्रवाई शुरू करने की शक्ति मिलती है।

नरेंद्र मोदी ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि किस तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर मासूम नागरिकों को ठगा जा रहा है। उन्होंने कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बैंकों और डिजिटल सेवा प्रदाताओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक ये सभी एजेंसियां एक साथ मिलकर और संवेदनशीलता के साथ काम नहीं करेंगी, तब तक इन आधुनिक अपराधियों पर लगाम लगाना संभव नहीं होगा।

क्या है ई-जीरो एफआईआर और इसके लाभ

ई-जीरो एफआईआर की इस पहल को गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (NCRP) द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं और लाभ इस प्रकार हैं:

  • क्षेत्राधिकार की बाधा खत्म: पीड़ित व्यक्ति देश के किसी भी हिस्से से अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। उसे संबंधित थाने तक जाने की आवश्यकता नहीं होती।

  • स्वतः रूपांतरण: उच्च मूल्य वाले साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में सत्यापित शिकायतों को प्रणाली स्वतः ‘जीरो एफआईआर’ में बदल देती है।

  • त्वरित वित्तीय सुरक्षा: यह व्यवस्था धोखाधड़ी वाले लेनदेन को तुरंत ट्रैक करने और पीड़ित के पैसे को बैंक स्तर पर ही रोकने (इंटरसेप्शन) में मदद करती है।

  • प्रक्रिया में तेजी: न्यायिक और प्रशासनिक बाधाओं को कम कर जांच की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाती है।

एजेंसियों की जवाबदेही और भविष्य की रणनीति
प्रधानमंत्री ने बैठक में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस अभियान में अपनी जिम्मेदारी तय करें। उन्होंने बैंकों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों को भी चेतावनी दी कि सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मोदी ने कहा कि वे स्वयं समय-समय पर ई-जीरो एफआईआर की प्रगति की रिपोर्ट लेंगे और राज्यों के प्रदर्शन का आकलन करेंगे।

बैठक के अंत में प्रधानमंत्री ने देश के नागरिकों से भी अपील की कि वे डिजिटल लेन-देन के दौरान सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज का जवाब न दें। उन्होंने विश्वास जताया कि ई-जीरो एफआईआर जैसी तकनीकी पहल और सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता से भारत को साइबर अपराधों से मुक्त करने में बड़ी सफलता मिलेगी। इस बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में साइबर सुरक्षा केवल पुलिस का कार्य नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय प्राथमिकता होगी जिसमें तकनीक और प्रशासन का बेहतर तालमेल देखने को मिलेगा।

 

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