नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े उथल-पुथल के संकेत मिल रहे हैं। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर मची भगदड़ के बाद अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) में बड़ी सेंधमारी की खबरें सामने आ रही हैं। जानकारी के अनुसार, उद्धव गुट के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो सकते हैं। ये सभी बागी सांसद मंगलवार रात एक चार्टर्ड विमान के जरिए दिल्ली पहुंच चुके हैं, जहां उनके लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना के मुख्य नेता एकनाथ शिंदे भी इस समय दिल्ली में ही मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि बागी सांसदों की अहम बैठक सांसद श्रीकांत शिंदे के सरकारी आवास पर आयोजित की जा सकती है। इस बैठक के बाद एक औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इन सांसदों के अगले कदम की घोषणा की जा सकती है। शिवसेना (शिंदे गुट) के एमएलसी कृपाल तुमाने ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत पिछले एक महीने से इन सांसदों के साथ गहन चर्चा चल रही थी और अब यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
इस संभावित टूट की खबरों के बीच उद्धव गुट की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विवादित पोस्ट साझा की है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि पार्टी बदलने के लिए सांसदों को भारी-भरकम राशि दी जा रही है। राउत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि “अपना सपना मनी मनी।” उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र के सांसदों को पाला बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि दी जा रही है, जो बेहद शर्मनाक है। हालांकि, इससे पहले राउत इन खबरों को सिरे से खारिज कर रहे थे, लेकिन सांसदों के दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने हमलावर रुख अपना लिया है।
दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे ने इस पूरी स्थिति पर बेहद शांत लेकिन सख्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पूर्व में हुई बगावत का जिक्र करते हुए कहा था कि जिसे जाना है, वह खुशी-खुशी जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी को भी पार्टी में रहने के लिए मजबूर नहीं करेंगे और न ही किसी पर दबाव बनाएंगे। ठाकरे का कहना है कि जो लोग बालासाहेब ठाकरे की विरासत और मूल शिवसेना को छोड़कर जा रहे हैं, उन्हें भविष्य में निश्चित रूप से अपने इस फैसले पर पछताना होगा। महाराष्ट्र की राजनीति में इस नए घटनाक्रम ने विपक्षी गठबंधन के लिए बड़ी चिंता पैदा कर दी है।
बगावत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां
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दो-तिहाई का आंकड़ा: यदि 6 सांसद एक साथ अलग होते हैं, तो वे दलबदल विरोधी कानून के दायरे से बाहर रह सकते हैं, क्योंकि यह कुल संख्या का दो-तिहाई हिस्सा है।
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दिल्ली में हलचल: सांसदों का चार्टर्ड विमान से दिल्ली पहुंचना इस बात का पुख्ता संकेत है कि पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी है।
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शिंदे गुट का दावा: कृपाल तुमाने ने दावा किया कि संपर्क में रहे सांसदों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।
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संजय राउत का हमला: राउत ने पैसों के लेनदेन के गंभीर आरोप लगाकर राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।
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उद्धव ठाकरे का रुख: पार्टी प्रमुख ने किसी भी प्रकार की जोर-जबरदस्ती से इनकार करते हुए बागियों को भविष्य के लिए चेतावनी दी है।
महाराष्ट्र की राजनीति में सांसदों की यह संभावित टूट आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और संगठनात्मक झटका साबित हो सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें दिल्ली में होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस और लोकसभा स्पीकर के निर्णय पर टिकी हुई हैं।