Uttarakhand: मोदी सरकार के 12 साल उत्तराखंड के लिए साबित हुए विकास का स्वर्ण युग कनेक्टिविटी में आया ऐतिहासिक बदलाव

देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की कमान संभाले जाने के बाद पिछले 12 वर्षों के दौरान उत्तराखंड के बुनियादी ढांचे और परिवहन सेवाओं में एक अभूतपूर्व क्रांति देखने को मिली है। सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हुए कार्यों ने न केवल पहाड़ और मैदान की दूरी को कम किया है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने केंद्र की इन योजनाओं के क्रियान्वयन में ‘डबल इंजन’ की रफ्तार जोड़कर उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है।

सड़क परिवहन के क्षेत्र में सबसे क्रांतिकारी बदलाव ‘चारधाम ऑल वेदर रोड’ परियोजना के माध्यम से आया है। दिसंबर 2016 में प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई करीब 12,000 करोड़ रुपये की इस महात्वाकांक्षी योजना का 90 प्रतिशत कार्य अब पूर्ण हो चुका है। इसके फलस्वरूप बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा अब साल भर सुगम और सुरक्षित हो गई है। इसके साथ ही ‘दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर’ एक और बड़ी उपलब्धि है। लगभग 11,963 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस 210 किलोमीटर लंबे हाईवे ने दिल्ली और देहरादून के बीच के सफर को महज ढाई घंटे तक सीमित कर दिया है, जो कुछ साल पहले तक अकल्पनीय था। वर्तमान में सितारगंज-टनकपुर और ऋषिकेश-भानियावाला जैसी कई अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है।

हवाई सेवाओं के विस्तार ने भी उत्तराखंड के पर्यटन और आपातकालीन सेवाओं को नया आयाम दिया है। ‘उड़ान’ योजना के तहत राज्य में 18 हेलीपोर्ट विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से 12 पर सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। देहरादून, पंतनगर और पिथौरागढ़ जैसे प्रमुख हवाई अड्डों का विस्तार कर उन्हें आधुनिक स्वरूप दिया गया है। देहरादून एयरपोर्ट अब सीधे तौर पर मुंबई, बैंगलोर, कोलकाता और जयपुर जैसे बड़े महानगरों से जुड़ चुका है। इसके अलावा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ‘मुख्यमंत्री उड़न खटोला योजना’ ने प्रदेश के दूरस्थ पहाड़ी जिलों को देहरादून और हल्द्वानी से हेली सेवा के माध्यम से जोड़कर आम आदमी के हवाई सफर के सपने को हकीकत में बदल दिया है।

पहाड़ों में रेल पहुंचाने का वर्षों पुराना सपना भी अब साकार होने की कगार पर है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना का 72 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है, जो दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में इंजीनियरिंग का एक अनूठा उदाहरण है। मुख्यमंत्री धामी के प्रयासों से केंद्र सरकार ने अब टनकपुर-बागेश्वर और डोईवाला से गंगोत्री-यमुनोत्री रेल मार्ग के सर्वे को भी अपनी मंजूरी दे दी है। साथ ही ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत उत्तराखंड के 11 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्राप्त होंगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री के इस कार्यकाल को उत्तराखंड के विकास का ‘स्वर्णिम अध्याय’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि विगत 12 वर्षों में राज्य के हर हिस्से की कनेक्टिविटी इतनी मजबूत हुई है कि अब प्रदेश के किसी भी कोने से बड़े शहरों तक कुछ ही घंटों में पहुंचना संभव है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि कनेक्टिविटी के इस मजबूत नेटवर्क के दम पर उत्तराखंड आने वाले समय में देश का श्रेष्ठ राज्य बनने के अपने संकल्प को अवश्य सिद्ध करेगा। परिवहन के इन साधनों ने न केवल यात्रा को आसान बनाया है, बल्कि निवेश, रोजगार और व्यापार के नए द्वार भी खोले हैं।

 

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