नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को कड़ा निर्देश देते हुए कहा है कि वह 12वीं कक्षा की इंप्रूवमेंट परीक्षा के नतीजे जल्द से जल्द घोषित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए। अदालत ने यह आदेश पश्चिमी एशियाई देशों के कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए दिया है, ताकि नतीजों में देरी की वजह से उनकी दाखिला प्रक्रिया प्रभावित न हो। न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने बोर्ड को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इसके लिए चाहे कितनी भी मेहनत करनी पड़े, वह आगामी शुक्रवार तक एक ठोस योजना अदालत के समक्ष पेश करे।
अदालत ने यह फैसला सऊदी अरब में रहने वाले एक छात्र की याचिका पर सुनवाई के दौरान लिया। याचिकाकर्ता छात्र ने सीबीएसई को अपनी 12वीं की सुधार परीक्षा (इंप्रूवमेंट एग्जाम) का परिणाम तुरंत जारी करने के लिए निर्देश देने की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
सुनवाई के दौरान जब सीबीएसई के वकील ने याचिका पर विस्तृत जवाब देने के लिए और अधिक समय की मांग की, तो पीठ ने उसे सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस समस्या का समाधान शुक्रवार तक निकलना चाहिए ताकि याचिकाकर्ता और उसके जैसे अन्य प्रभावित छात्रों के हितों की रक्षा की जा सके। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि आवश्यकता हो तो बोर्ड के कर्मचारी दिन-रात काम करें, लेकिन शुक्रवार यानी 12 जून तक समाधान के साथ उपस्थित हों।
छात्र की ओर से पक्ष रखते हुए वकील राज किशोर चौधरी ने अदालत को बताया कि परिणाम घोषित होने में हो रही देरी का सीधा असर छात्र के करियर पर पड़ रहा है। छात्र पहले ही विदेशी विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए आवेदन कर चुका है, लेकिन मार्कशीट और अंतिम परिणाम न होने के कारण वह प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहा है। यदि समय पर नतीजे नहीं आए तो उसे दाखिले के महत्वपूर्ण अवसर से हाथ धोना पड़ सकता है।
याचिका में बताया गया है कि युद्ध और अन्य विशेष परिस्थितियों के कारण पश्चिमी एशियाई देशों में पढ़ रहे हजारों छात्रों की समस्याओं को देखते हुए सरकार ने एक मूल्यांकन योजना (असेसमेंट स्कीम) अधिसूचित की थी। इस योजना के अनुसार, रद्द की गई परीक्षाओं के अंक छात्र के तिमाही, छमाही और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के प्रदर्शन के आधार पर तय किए जाने थे।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि बोर्ड ने बिना किसी स्पष्ट कारण के उसके रिजल्ट स्टेटस में ‘आरएल’ (रिजल्ट बाद में) दिखा दिया। छात्र ने दावा किया कि उसने बोर्ड के समक्ष कई बार अपना पक्ष रखा और बार-बार रिमाइंडर भेजे, लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ऐसी स्थिति में उसके पास अदालत की शरण में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। छात्र ने मांग की है कि या तो उसके विषयों का मूल्यांकन अधिसूचित योजना के अनुसार किया जाए या उसे विशेष परीक्षाओं में शामिल होने का मौका दिया जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 जून को होगी, जहां सीबीएसई को अपनी कार्ययोजना पेश करनी होगी।
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