Uttarpradesh: प्रकृति के बीच पर्यटक नहीं जिज्ञासु विद्यार्थी बनकर जाएं बोले योगी आदित्यनाथ

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को राज्य की जनता के नाम एक विशेष पत्र साझा किया है, जिसे ‘योगी की पाती’ का नाम दिया गया है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने प्रदेशवासियों से प्रकृति के प्रति अपनी सोच बदलने और जैव विविधता के संरक्षण में सक्रिय जनभागीदारी निभाने की भावुक अपील की है। योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर जोर दिया है कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में प्रकृति से विमुख होना मानवता के लिए हितकारी नहीं है। उन्होंने जनता से आग्रह किया है कि वे जब भी प्राकृतिक स्थलों पर जाएं, तो वहां केवल एक पर्यटक की तरह घूमने के बजाय एक जिज्ञासु विद्यार्थी बनकर वहां के परिवेश को गहराई से समझने का प्रयास करें।

अपने पत्र में योगी आदित्यनाथ ने लिखा है कि जैव विविधता का संरक्षण केवल सरकारी नीतियों या प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने सनातन संस्कृति का हवाला देते हुए कहा कि हमारी प्राचीन परंपराओं में प्रकृति के प्रत्येक जीव को इस सृष्टि का एक अनिवार्य और अभिन्न अंग माना गया है। प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति यह सम्मान और संरक्षण का भाव ही हमारी असली सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने प्रदेशवासियों को संदेश दिया है कि जैव विविधता के संरक्षण का संकल्प तभी सफल होगा, जब राज्य का प्रत्येक नागरिक इसे अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करेगा।

योगी आदित्यनाथ ने पत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि अक्सर लोग प्राकृतिक स्थलों पर केवल मनोरंजन या पर्यटन के उद्देश्य से जाते हैं। लेकिन यदि हम वहां एक जिज्ञासु विद्यार्थी की भांति जाते हैं, तो हम प्रकृति की बारीकियों, पारिस्थितिकी तंत्र और उसकी सुंदरता को अधिक गंभीरता से परख सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और प्रकृति प्रेमियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे अपने प्राकृतिक अनुभवों को केवल अपने तक सीमित न रखें। उन्होंने सुझाव दिया कि लोग अपने अनुभवों को व्लॉग, आलेखों और अन्य माध्यमों से समाज के साथ साझा करें। उनके अनुसार, प्रकृति के प्रति जागरूकता और अपनापन ही हमारी जैव विविधता के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच साबित होगा।

पत्र के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि आधुनिक बनने का अर्थ यह कतई नहीं है कि हम अपनी जड़ों और प्राकृतिक परिवेश को भूल जाएं। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ हमारा जुड़ाव जितना गहरा और संवेदनशील होगा, हमारा भविष्य उतना ही सुरक्षित और खुशहाल होगा। योगी आदित्यनाथ ने लोगों से अपील की है कि वे स्थानीय वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के बारे में जानकारी जुटाएं और उनके संरक्षण के लिए अपने स्तर पर छोटे-छोटे लेकिन प्रभावी कदम उठाएं।

मुख्यमंत्री का यह पत्र ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन की गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल भौगोलिक विविधता वाले राज्य में, जहां समृद्ध वन्यजीव और महत्वपूर्ण नदियां हैं, वहां योगी आदित्यनाथ की यह अपील अत्यंत प्रासंगिक मानी जा रही है। उन्होंने अपने पत्र के अंत में पुनः दोहराया कि प्रकृति के प्रति हमारा अपनत्व और अनुराग ही आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और स्वस्थ धरती सुनिश्चित कर सकता है। इस पत्र ने प्रदेश में पर्यावरण के प्रति एक नई चेतना जागृत करने का कार्य किया है।

 

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