आयुर्वेदिक चाय देगी एसिडिटी से राहत, जानिए बनाने का सही तरीका

खबरें सुने

आयुर्वेदिक कैलेंडर में तीन मौसम होते हैं, जो तीन दोषों जैसे वात, पित्त और कफ से संबंधित होता है। वात का अक्टूबर से फरवरी होता है, पित्त का मौसम जुलाई से अक्टूबर के बीच रहता है और कफ का मौसम मार्च से जून के बीच होता है। ऐसा माना जाता है कि इन मौसम में संक्रमण के दौरान शरीर में इम्यूनिटी में असंतुलन के कारण कई सारे परिवर्तन होते हैंऔर आयुर्वेद में, शरीर के सभी असंतुलन और इशू को तीन दोषों के में समझाया जा सकता है। गैस, एसिडिटी, या ब्लोटिंग वात दोष के बढ़ने का एक क्लासिक लक्षण है। ऐसे में इन समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप इस रैसीपि की मदद ले सकते हैं-

आयुर्वेदिक चाय बनाने के लिए आपको धनिया के बीज, जीरा और सौंफ के बीज चाहिए। इसके लिए उबलते पानी में तीन सामग्री डालें। इसे 15 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें, ताकि पोषक तत्व पानी में मिल जाएं। बाद में, इस चाय को पूरे दिन में हर आधे घंटे के अंतराल पर पीएं याद रखें। यह वात असंतुलन को संतुलित करेगा और सूजन, कब्ज या एसिडिटी को भी ठीक करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *