TN: विजय की सरकार पर मंडराया संकट मद्रास हाई कोर्ट ने एक विधायक की शपथ पर लगाई रोक – The Hill News

TN: विजय की सरकार पर मंडराया संकट मद्रास हाई कोर्ट ने एक विधायक की शपथ पर लगाई रोक

नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता विजय की नवगठित सरकार की राह आसान होती नजर नहीं आ रही है। तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) के प्रमुख विजय ने हाल ही में अन्य दलों के समर्थन से मुख्यमंत्री पद की शपथ तो ले ली, लेकिन विधानसभा में शक्ति परीक्षण (फ्लोर टेस्ट) से ठीक पहले एक नया कानूनी संकट खड़ा हो गया है। मद्रास हाई कोर्ट ने टीवीके के एक नवनिर्वाचित उम्मीदवार की शपथ पर रोक लगा दी है, जिससे सरकार के बहुमत के गणित पर असर पड़ सकता है।

पूरा मामला तिरुपत्तूर विधानसभा सीट से जुड़ा है, जहां टीवीके के उम्मीदवार आर. श्रीनिवासा सेतुपति ने बेहद नाटकीय मुकाबले में जीत दर्ज की थी। चुनाव परिणामों के अनुसार, सेतुपति को मात्र एक वोट के अंतर से विजयी घोषित किया गया था। उन्हें कुल 83,365 मत प्राप्त हुए थे, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी और डीएमके उम्मीदवार के.आर. पेरियाकरुप्पन को 83,364 वोट मिले थे। इस कांटे की टक्कर के बाद पेरियाकरुप्पन ने चुनाव प्रक्रिया, विशेष रूप से डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलट) की गिनती में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

मद्रास हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रीनिवासा सेतुपति के विधायक के रूप में शपथ लेने पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश का सीधा अर्थ यह है कि सेतुपति आगामी फ्लोर टेस्ट के दौरान सदन में उपस्थित रहकर मतदान नहीं कर पाएंगे। एक वोट से मिली जीत पर कानूनी संशय ने विजय की पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है, क्योंकि विधानसभा में हर एक विधायक का समर्थन महत्वपूर्ण होता है।

तमिलनाडु विधानसभा की कुल 234 सीटों में से विजय की पार्टी टीवीके ने 108 सीटों पर कब्जा किया है। चूंकि विजय ने स्वयं दो सीटों से चुनाव जीता था, इसलिए नियमों के मुताबिक एक सीट छोड़ने पर उनकी पार्टी के पास विधायकों का प्रभावी आंकड़ा 107 रह जाएगा। राज्य में बहुमत साबित करने के लिए किसी भी दल को कम से कम 118 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। विजय ने कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई-एम और वीसीके जैसे दलों के समर्थन से 121 विधायकों का बहुमत होने का दावा पेश किया है, जिसके आधार पर राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दिया था।

यदि श्रीनिवासा सेतुपति वोट नहीं भी दे पाते हैं, तो भी कागजों पर विजय की सरकार के पास 120 विधायकों का समर्थन शेष रहेगा, जो बहुमत के आंकड़े 118 से अधिक है। हालांकि, राजनीति में अंतिम समय में होने वाले उलटफेर और असंतुष्ट विधायकों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। बुधवार को होने वाले संभावित फ्लोर टेस्ट से पहले एक विधायक की सदस्यता पर संशय खड़ा होना विपक्षी दलों को हमलावर होने का मौका दे सकता है। विजय के लिए असली परीक्षा अब सदन के पटल पर होगी, जहां उन्हें यह साबित करना होगा कि उनके गठबंधन के सभी साथी पूरी तरह उनके साथ खड़े हैं। सेतुपति की शपथ पर लगी यह रोक फिलहाल विजय की नई सरकार के उत्साह पर थोड़ा ब्रेक लगाने वाली साबित हुई है।

 

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