देहरादून। उत्तराखंड में ‘हर घर जल’ के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाने के लिए जल
जीवन मिशन 2.0 के तहत एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर
किए गए। यह समझौता पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (जल शक्ति
मंत्रालय) और उत्तराखंड सरकार के बीच हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस
कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से शिरकत की और राज्य के लिए इस समझौते को विकास का
एक नया अध्याय बताया।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय जल शक्ति
मंत्री सी.आर. पाटिल का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह एमओयू
उत्तराखंड जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में जल आपूर्ति
के कार्यों को नई दिशा और गति प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि
उत्तराखंड में जल जीवन मिशन महज एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह
राज्य के लगभग 14 लाख ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य, सुविधा और जीवन स्तर
को बेहतर बनाने का एक बड़ा अभियान है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में अब तक
लगभग 16,500 पेयजल योजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से अधिकांश पूरी हो
चुकी हैं और शेष पर युद्ध स्तर पर कार्य जारी है।
पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि भूस्खलन, आपदा
संवेदनशीलता और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों के कारण यहाँ योजनाओं को धरातल पर
उतारना अन्य मैदानी राज्यों की तुलना में काफी कठिन है। इसके बावजूद,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप हिमालयी पर्यावरण
और जल स्रोतों के संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने डिजिटल मॉनिटरिंग
सिस्टम और ग्लेशियर रिसर्च सेंटर जैसे आधुनिक प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया
कि राज्य सरकार जल संरक्षण के लिए जनभागीदारी को बढ़ावा दे रही है।
जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों का विवरण देते
हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी’ (सारा) का
गठन किया गया है। बीते एक वर्ष में इस प्राधिकरण के माध्यम से 6,500 से अधिक जल
स्रोतों का उपचार और संरक्षण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, साढ़े तीन मिलियन घन
मीटर वर्षा जल का संचयन करना सरकार की एक बड़ी उपलब्धि रही है। जल शक्ति अभियान
के तहत 1000 गांवों के तालाबों और पारंपरिक जल स्रोतों को नया जीवन दिया जा रहा
है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि
उत्तराखंड सरकार जल स्रोतों और नदियों के संरक्षण में अनुकरणीय कार्य कर रही
है। उन्होंने केंद्र की ओर से राज्य को हर संभव तकनीकी और वित्तीय सहायता का
आश्वासन दिया। इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना, सचिव अशोक
कुमार मीणा, अपर सचिव कमल किशोर सोन और उत्तराखंड के पेयजल सचिव रणवीर सिंह चौहान
सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह समझौता राज्य में सुरक्षित पेयजल की
उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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