Uttarakhand: हरीश रावत का दिनेश अग्रवाल पर बड़ा हमला उज्याडू बल्द के संबोधन को बताया अपनी पुरानी गलती का नतीजा

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इन दिनों भले ही राजनीतिक कार्यों से अवकाश पर हों, लेकिन वे सोशल मीडिया के माध्यम से विरोधियों पर हमला करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। शनिवार को उन्होंने एक लंबी पोस्ट साझा कर भाजपा नेता दिनेश अग्रवाल को कड़े लहजे में घेरा। यह पूरा विवाद दिनेश अग्रवाल द्वारा हरीश रावत के लिए ‘उज्याडू बल्द’ (खेत उजाड़ने वाला बैल) शब्द के प्रयोग से शुरू हुआ, जिस पर रावत ने बेहद व्यंग्यात्मक और आक्रामक प्रतिक्रिया दी है।

हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में प्रसिद्ध कहावत ‘बुरा देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय’ का उल्लेख करते हुए लिखा कि दिनेश अग्रवाल के मुख से खुद के लिए ‘उज्याडू बल्द’ शब्द सुनकर उन्हें एक पुराने घटनाक्रम का आभास हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अग्रवाल ने बिल्कुल सही कहा है, मैं वास्तव में ‘उज्याडू बल्द’ ही हूं। रावत ने साल 2012 की एक राजनीतिक घटना को याद करते हुए बताया कि जब राज्य में मंत्रिमंडल के गठन के लिए विचार-विमर्श चल रहा था, तब उन्होंने वास्तव में एक विनाशकारी भूमिका निभाई थी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि उस समय हक और परिस्थितियां यह चीख-चीख कर कह रही थीं कि पिथौरागढ़ के विधायक मयूख महर को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना चाहिए। लेकिन, उन्होंने मयूख महर के स्थान पर दिनेश अग्रवाल का पक्ष लिया। रावत ने पार्टी नेतृत्व से कड़ा आग्रह किया था कि मयूख महर उनकी बात मान लेंगे, इसलिए उन्हें योजना आयोग का अध्यक्ष बनाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया जाए और मुख्य मंत्रिमंडल में दिनेश अग्रवाल को जगह दी जाए। रावत के अनुसार, उनका यह आग्रह प्रबल था जिसे स्वीकार कर लिया गया और अग्रवाल मंत्री बन गए।

अपने उस निर्णय पर अफसोस जताते हुए हरीश रावत ने कहा कि उनके उस फैसले का परिणाम 2024 में देखने को मिला, जब दिनेश अग्रवाल ने उस कांग्रेस पार्टी को छोड़ दिया जिससे उनका वर्षों का नाता था। उन्होंने लिखा कि अग्रवाल ने ठीक लोकसभा चुनाव के समय पार्टी का साथ छोड़ा। रावत ने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि अग्रवाल के इस निर्णय में मोथरोवाला का बड़ा योगदान था। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके उस पुराने फैसले ने पिथौरागढ़ में कांग्रेस के भीतर राजनीतिक असंतुलन पैदा किया, इसलिए वे ‘उज्याडू बल्द’ के संबोधन को स्वीकार करते हैं।

पोस्ट के अंत में हरीश रावत ने भाजपा पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि उन्हें इस बात की प्रसन्नता है कि उनके कारण ही उनके कुछ पुराने दोस्त आज भाजपा में अपनी उपयोगिता बनाए हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी भाजपा को उनके खिलाफ कुछ भी अनर्गल या उल्टा-सीधा कहलवाना होता है, तो वह इन्हीं नेताओं का इस्तेमाल करती है। रावत की यह सोशल मीडिया पोस्ट प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा का विषय बनी हुई है।

 

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