नई दिल्ली। 1 अप्रैल 2026 से नए वित्त वर्ष का आगाज हो चुका है और इसी के साथ देश में आर्थिक लेन-देन और कर प्रणाली से जुड़े कई बड़े बदलाव लागू हो गए हैं। इन बदलावों का सीधा प्रभाव आम नागरिकों की बचत, खर्च और दैनिक जीवन पर पड़ेगा। सरकार और विभिन्न नियामक संस्थाओं ने आयकर से लेकर रेलवे सफर और डिजिटल भुगतान तक की व्यवस्थाओं को नए सिरे से तैयार किया है।
इस नए वित्त वर्ष की पहली सुबह महंगाई के झटके के साथ हुई है। कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में 218 रुपये तक की भारी बढ़ोतरी की गई है। इसके चलते दिल्ली में जो कमर्शियल सिलिंडर पहले 1883 रुपये में उपलब्ध था, उसकी कीमत अब बढ़कर 2078.50 रुपये हो गई है। यह बढ़त व्यवसाय करने वाले लोगों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
कर प्रणाली में एक ऐतिहासिक परिवर्तन करते हुए 1961 के पुराने आयकर अधिनियम को समाप्त कर दिया गया है। अब इसकी जगह ‘आयकर अधिनियम, 2025’ प्रभावी हो गया है। नई व्यवस्था में प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘प्रीवियस ईयर’ जैसे शब्दों की जटिलता को खत्म कर दिया गया है। अब 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली अवधि को सीधे ‘टैक्स ईयर 2026-27’ के नाम से जाना जाएगा, जिससे करदाताओं के लिए भ्रम की स्थिति कम होगी।
नौकरीपेशा लोगों की ‘टेक-होम’ सैलरी पर भी नए लेबर कोड का असर पड़ सकता है। नए नियमों के अनुसार, कर्मचारी की बेसिक सैलरी उसके कुल सीटीसी का कम से कम 50 प्रतिशत होनी अनिवार्य है। इससे भविष्य निधि (पीएफ) और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ेगा, जिससे भविष्य सुरक्षित होगा लेकिन वर्तमान में हाथ में आने वाली सैलरी कम हो जाएगी। साथ ही, अब हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) पर टैक्स छूट पाने के लिए मकान मालिक का पैन कार्ड देना अनिवार्य कर दिया गया है।
यातायात के क्षेत्र में भी जेब पर बोझ बढ़ा है। एनएचएआई ने फास्टैग के वार्षिक पास की कीमत बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी है। रेलवे ने भी टिकट कैंसिलेशन की रिफंड पॉलिसी में बदलाव किया है। अब ट्रेन छूटने से 8 घंटे से कम समय रहने पर टिकट रद कराने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा। 8 से 24 घंटे पहले टिकट रद करने पर केवल 50 प्रतिशत राशि ही वापस मिलेगी।
पैन कार्ड बनवाने के नियमों को भी सख्त किया गया है। अब जन्म तिथि के प्रमाण के तौर पर केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं होगा। आवेदकों को जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज देने होंगे। इसके अतिरिक्त, आरबीआई के नए निर्देशों के बाद अब बैंक हर हफ्ते ग्राहकों का लोन डेटा क्रेडिट कंपनियों को भेजेंगे, जिससे क्रेडिट स्कोर अधिक अपडेटेड रहेगा। सोने में निवेश करने वालों के लिए भी नया नियम है कि स्टॉक एक्सचेंज से खरीदे गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर अब 12.5 प्रतिशत का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। डिजिटल पेमेंट की सुरक्षा बढ़ाते हुए अब यूपीआई और कार्ड भुगतान के लिए ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ को जरूरी कर दिया गया है।