शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का 62वां जन्मदिन आज उनके सरकारी आवास ‘ओक ओवर’ में बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर सुबह से ही उनके आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। समाज के विभिन्न वर्गों के लोग, पार्टी कार्यकर्ता, कैबिनेट सहयोगी, वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी और आम नागरिक बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री को शुभकामनाएं देने पहुंचे। सभी ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, लंबी आयु और सफल नेतृत्व की कामना की।
जन्मदिन के इस अवसर को यादगार बनाने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ओक ओवर परिसर में चिनार का एक पौधा लगाया। यह वृक्षारोपण पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति उनके दृष्टिकोण का प्रतीक माना जा रहा है। इस दौरान उनकी पत्नी और देहरा से विधायक कमलेश ठाकुर सहित परिवार के अन्य सदस्य भी उनके साथ मौजूद रहे।
इससे पहले दिन की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश सचिवालय के कर्मचारियों द्वारा आयोजित एक मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह दौड़ सचिवालय परिसर से शुरू होकर ऐतिहासिक रिज मैदान तक पहुंची, जिसमें कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट पूरी तरह से जन-केंद्रित है, जिसका एकमात्र लक्ष्य आम आदमी का कल्याण और पिछड़े वर्गों का उत्थान है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य के समावेशी विकास और समृद्धि के लिए आगामी समय में और अधिक प्रभावशाली निर्णय लेने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार सेवा भाव और समर्पण के साथ कार्य कर रही है ताकि सुशासन के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच सके।
अपने संबोधन में उन्होंने वर्ष 1952 से मिल रहे राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को अचानक बंद किए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने इसे हिमाचल प्रदेश की जनता का हक बताया और कहा कि राज्य सरकार इसकी बहाली के लिए मजबूती से अपनी बात केंद्र के समक्ष रखती रहेगी। उन्होंने रेखांकित किया कि हिमाचल प्रदेश देश को प्रतिवर्ष लगभग 90,000 करोड़ रुपये की पारिस्थितिक सेवाएं प्रदान कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने राजकोषीय प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन में सुधार लाने की बात भी कही। उन्होंने कर्मचारियों के लिए ‘पुरानी पेंशन योजना’ (ओपीएस) की बहाली को सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उत्सव के दौरान उन्होंने 18 महिला लाभार्थियों को अपना घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता की पहली किस्त के रूप में एक-एक लाख रुपये के चेक प्रदान किए। इस मौके पर रक्तदान शिविर और मुक्केबाजी प्रतियोगिता जैसे रचनात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिसमें कई मंत्रियों और विधायकों ने शिरकत की।
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