नई दिल्ली। मनोरंजन जगत में उस समय खलबली मच गई जब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने एक फिल्मी गाने में अश्लीलता और अभद्रता के गंभीर आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया। आयोग ने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ गाने को लेकर अभिनेत्री नोरा फतेही और अभिनेता संजय दत्त सहित फिल्म निर्माण से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तियों को आधिकारिक समन जारी कर तलब किया है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है। आयोग का मानना है कि इस गाने के दृश्य और बोल महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाते हैं और समाज में गलत संदेश देते हैं। मीडिया रिपोर्टों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए आयोग ने इस मामले में शामिल सभी पक्षों से जवाब मांगा है।
राष्ट्रीय महिला आयोग की सख्त टिप्पणी
आयोग ने इस मामले की जानकारी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से साझा की है। आयोग के अनुसार, ‘सरके चुनर तेरी सरके’ गाने के दृश्यों और प्रस्तुतीकरण को पहली बार देखने पर ही यह स्पष्ट होता है कि इसमें यौन उत्तेजक और आपत्तिजनक सामग्री का समावेश किया गया है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह गाना न केवल सामाजिक मर्यादाओं का उल्लंघन करता है, बल्कि यह भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और विशेष रूप से पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों का प्रथम दृष्टया उल्लंघन प्रतीत होता है। इन कानूनों के उल्लंघन की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने इसे केवल एक मनोरंजन का विषय न मानकर कानूनी दायरे में लाने का निर्णय लिया है।
इन दिग्गजों को जारी हुआ समन
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस विवादित मामले में पांच मुख्य व्यक्तियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। समन पाने वालों में अभिनेत्री नोरा फतेही और अभिनेता संजय दत्त के नाम सबसे ऊपर हैं, जिन्होंने इस गाने में मुख्य भूमिका निभाई है। इनके अलावा गाने के बोल लिखने वाले रकीब आलम, केवीएन समूह के निर्माता वेंकट के. नारायण और निर्देशक किरण कुमार को भी आयोग के समक्ष पेश होने को कहा गया है। आयोग ने इन सभी को मंगलवार, 24 मार्च को दोपहर 12:30 बजे तक आयोग के कार्यालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है। उपस्थित होते समय इन सभी को इस गाने से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज और अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त प्रमाण भी साथ लाने को कहा गया है।
उपस्थित न होने पर कार्रवाई की चेतावनी
आयोग ने अपने समन में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित तिथि और समय पर संबंधित व्यक्ति उपस्थित नहीं होते हैं, तो इसे आयोग के आदेशों की अवहेलना माना जाएगा। ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय महिला आयोग कानून के मुताबिक उचित और कठोर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। आयोग का यह रुख दर्शाता है कि वह महिलाओं के प्रति बढ़ती अश्लीलता और अभद्रता को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है।
मानवाधिकार आयोग ने भी कसी कमर
यह मामला केवल महिला आयोग तक ही सीमित नहीं रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस पर अपनी सक्रियता दिखाई है। मानवाधिकार आयोग ने इस गाने के प्रसार और इसके कंटेंट की जांच के लिए कई महत्वपूर्ण संस्थानों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा गूगल इंडिया शामिल हैं। इन संस्थाओं से पूछा गया है कि इस तरह के आपत्तिजनक कंटेंट को सार्वजनिक मंचों पर आने की अनुमति कैसे मिली और इसे रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
फिल्म केडी द डेविल और निर्माताओं का यू-टर्न
विवादों में घिरा यह गाना ‘सरके चुनर तेरी सरके’ आगामी फिल्म ‘केडी: द डेविल’ का हिस्सा है। जैसे ही गाना रिलीज हुआ, सोशल मीडिया पर संजय दत्त और नोरा फतेही को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा। दर्शकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गाने के भद्दे डांस स्टेप्स और बोलों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। चारों तरफ से बढ़ते दबाव और कानूनी कार्रवाई की आहट को भांपते हुए फिल्म के निर्माताओं ने तत्काल कदम उठाए हैं। निर्माताओं ने इस गाने को आधिकारिक रूप से यूट्यूब और अन्य संगीत प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया है। हालांकि, आयोग का मानना है कि केवल गाना हटा देना ही पर्याप्त नहीं है और इसके निर्माण की जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
रचनात्मक टीम पर उठे सवाल
इस गाने को प्रसिद्ध गायिका मंगली ने अपनी आवाज दी है, जबकि इसके बोल रकीब आलम ने तैयार किए हैं। संगीत निर्देशन का कार्य अर्जुन जन्या ने संभाला है। अब इन सभी की भूमिका की जांच की जा रही है कि रचनात्मकता के नाम पर अश्लीलता को कैसे बढ़ावा दिया गया। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आयोग के आरोप सही पाए जाते हैं, तो फिल्म के प्रदर्शन और इसकी टीम की मुश्किलों में भारी इजाफा हो सकता है। फिलहाल, पूरी फिल्म इंडस्ट्री की नजरें 24 मार्च को होने वाली इस सुनवाई पर टिकी हैं, जो भविष्य में मनोरंजन जगत के लिए सेंसरशिप और नैतिकता के नए मानक तय कर सकती है।
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