देहरादून। उत्तराखंड के सुदूरवर्ती और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। बुधवार को राजधानी देहरादून स्थित सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में ‘राज्य ब्रॉडबैंड समिति’ की नौवीं महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु प्रदेश के उन हिस्सों में इंटरनेट सेवा पहुंचाना रहा, जो अपनी कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण अभी भी डिजिटल मुख्यधारा से कटे हुए हैं। आनंद बर्द्धन ने राज्य में इंटरनेट कनेक्टिविटी से जुड़ी विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं की गहन समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए।
सड़क के अभाव में फाइबर केबल बनेगा सहारा
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के कई ऐसे दुर्गम क्षेत्र हैं जहां वर्तमान में पक्की सड़कों की पहुंच नहीं है। ऐसे स्थानों पर मोबाइल टावर या अन्य 4जी उपकरण पहुंचाने के लिए सड़क निर्माण का इंतजार करने के बजाय वैकल्पिक रास्तों पर काम किया जाना चाहिए। आनंद बर्द्धन ने निर्देश दिए कि इन क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंचाने के लिए फाइबर केबल बिछाने के काम को प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही, जहां केबल बिछाना संभव न हो, वहां वाईफाई तकनीक के माध्यम से शीघ्र से शीघ्र कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि डिजिटल पहुंच के लिए भौतिक सड़कों की कमी कोई बाधा नहीं बननी चाहिए और इसके लिए अन्य आधुनिक विकल्पों पर भी विचार कर उनका उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
भारतनेट से जुड़ेंगे प्रदेश के सभी पंचायत भवन
ग्रामीण क्षेत्रों के डिजिटल सशक्तिकरण के लिए मुख्य सचिव ने ‘भारतनेट’ परियोजना की प्रगति जांची। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक पंचायत भवन को भारतनेट कनेक्टिविटी सुविधा से अनिवार्य रूप से संतृप्त किया जाए। आनंद बर्द्धन ने एक व्यवहारिक समस्या का समाधान करते हुए कहा कि जिन स्थानों पर वर्तमान में पंचायत भवनों का निर्माण कार्य चल रहा है या वे मरम्मत के कारण उपयोग में नहीं हैं, वहां कनेक्टिविटी का काम रुकना नहीं चाहिए। ऐसे मामलों में विकल्प के तौर पर नजदीकी सरकारी भवनों जैसे प्राथमिक विद्यालयों या आंगनवाड़ी केंद्रों में अस्थायी रूप से इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले निर्माण और मरम्मत कार्यों में भी तेजी लाने के आदेश दिए ताकि स्थायी बुनियादी ढांचा जल्द तैयार हो सके।
विभागों के बीच समन्वय के लिए आर.ओ.डब्ल्यू. पोर्टल
मुख्य सचिव ने शासन के भीतर विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय की कमी को दूर करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। अब राज्य सरकार का ‘राइट ऑफ वे’ (आर.ओ.डब्ल्यू.) पोर्टल पूरी तरह से आईटीडीए द्वारा संचालित और नियंत्रित किया जाएगा। आनंद बर्द्धन ने पेयजल, बिजली, गैस और संचार जैसे उन सभी विभागों को निर्देशित किया है जिनका कार्य सड़कों की खुदाई या अंडरग्राउंड लाइनें बिछाने से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि ये सभी विभाग अपने सिस्टम को जल्द से जल्द आर.ओ.डब्ल्यू. पोर्टल के साथ एकीकृत (इंटीग्रेट) करें। इस एकीकरण से विभागों के बीच कार्यों का दोहराव नहीं होगा और सड़कों के बार-बार कटान जैसी समस्याओं से निजात मिल सकेगी।
जवाबदेही तय: मासिक प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य
प्रशासनिक कार्यकुशलता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव ने जवाबदेही के कड़े मानक तय किए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि ‘कनेक्टिविटी सैचुरेशन’ यानी शत-प्रतिशत कनेक्टिविटी के लक्ष्य की प्राप्ति में आने वाली किसी भी बाधा को दूर करने के लिए निचले स्तर के अधिकारी सीधे संबंधित सचिवों से संवाद कर समाधान निकालें। उन्होंने जिला स्तरीय समितियों की बैठकों को निर्धारित समय अंतराल पर अनिवार्य रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही, आनंद बर्द्धन ने स्पष्ट किया कि कनेक्टिविटी से जुड़ी समस्त गतिविधियों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रत्येक माह अनिवार्य रूप से सचिव सूचना प्रौद्योगिकी (सचिव आईटी) को सौंपी जाए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ‘स्ट्रीट फर्नीचर मैपिंग’ के कार्य में भी तेजी लाने को कहा ताकि टावर और केबल स्थापना के लिए उपलब्ध संसाधनों का सही आकलन हो सके।
कॉल ड्रॉप और यात्रा मार्गों पर विशेष फोकस
आम नागरिकों को होने वाली असुविधाओं पर चर्चा करते हुए मुख्य सचिव ने टेलीकॉम कंपनियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने निजी और सरकारी मोबाइल सेवा प्रदाताओं को शहरी क्षेत्रों में बढ़ती ‘कॉल ड्रॉप’ की समस्या को तत्काल सुधारने के निर्देश दिए। आनंद बर्द्धन ने कहा कि पूरे प्रदेश में ऐसे ‘ब्लैक स्पॉट’ चिह्नित किए जाएं जहां मोबाइल नेटवर्क कमजोर रहता है या कॉल अचानक कट जाती है। उन्होंने इन क्षेत्रों में नेटवर्क सुदृढ़ीकरण के लिए ठोस प्लान मांगा है।
आगामी पर्यटन और चारधाम यात्रा सीजन को देखते हुए मुख्य सचिव ने कनेक्टिविटी के लिए विशेष सुरक्षा कवच तैयार करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि जब तक यात्रा मार्गों पर स्थायी मोबाइल टावर नहीं लग जाते, तब तक अस्थायी मोबाइल टावरों के माध्यम से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाए। उनका मानना है कि बेहतर संचार व्यवस्था से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन में भी सहायता मिलेगी।
इस महत्वपूर्ण बैठक में सचिव नितेश कुमार झा, सी. रविशंकर, केंद्रीय दूर संचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, बीएसएनएल के प्रतिनिधि और टावर्स एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोवाईडर्स एसोसिएशन के सदस्य उपस्थित रहे। मुख्य सचिव के इन कड़े निर्देशों के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि उत्तराखंड के डिजिटल ढांचे में आने वाले महीनों में बड़े और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी कोना ‘डिजिटल डार्क जोन’ न रहे।