देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राजनीति के दिग्गज व्यक्तित्व स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा की पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें भावपूर्ण स्मरण किया। राजधानी देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास पर एक गरिमामयी श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री ने बहुगुणा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उनके जीवन दर्शन, उनकी कार्यशैली और समाज के प्रति उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री का यह संबोधन न केवल एक औपचारिक श्रद्धांजलि थी, बल्कि यह उस महान नेता के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति थी, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन जनसेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित कर दिया।
एक दूरदर्शी और कुशल प्रशासक की याद
पुष्कर सिंह धामी ने हेमवती नंदन बहुगुणा के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे भारतीय राजनीति के उन विरले नेताओं में से थे, जिन्हें एक अत्यंत दूरदर्शी नेता और बेहद कुशल प्रशासक के रूप में मान्यता प्राप्त थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, बहुगुणा के पास भविष्य की चुनौतियों को भांपने और उनके समाधान के लिए ठोस रणनीति बनाने की अद्भुत क्षमता थी। उनके कालखंड में लिए गए प्रशासनिक निर्णय आज भी सुशासन की दिशा में एक मानक माने जाते हैं। उन्होंने शासन की मशीनरी को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए थे, जिसका लाभ उत्तर प्रदेश और उस समय के अविभाजित उत्तर प्रदेश (जिसमें वर्तमान उत्तराखंड भी शामिल था) की जनता को व्यापक स्तर पर मिला।
जनहित को सदैव रखा सर्वोपरि
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि हेमवती नंदन बहुगुणा का राजनीतिक जीवन पूरी तरह से ‘जनहित’ की धुरी पर घूमता था। उन्होंने कभी भी व्यक्तिगत लाभ या राजनीतिक महत्वाकांक्षा को जनता के हितों से ऊपर नहीं रखा। धामी ने कहा कि बहुगुणा का मानना था कि राजनीति का असली उद्देश्य समाज की सेवा करना और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। उनके लिए पद और सत्ता केवल वे माध्यम थे, जिनके जरिए वे अधिक से अधिक लोगों की मदद कर सकें। उनकी इसी निस्वार्थ भावना के कारण उन्हें ‘जननेता’ का सम्मान प्राप्त हुआ और समाज के हर वर्ग ने उन्हें अपना मार्गदर्शक माना।
कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य
हेमवती नंदन बहुगुणा की संवेदनशीलता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनके हृदय में समाज के कमजोर, वंचित और शोषित वर्गों के लिए एक विशेष स्थान था। उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक सफर के दौरान निरंतर इस बात के लिए प्रयास किया कि विकास की किरण समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने बताया कि बहुगुणा ने गरीबों के आर्थिक सशक्तिकरण और उन्हें सामाजिक न्याय दिलाने के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाए थे। वे जानते थे कि जब तक समाज का सबसे कमजोर वर्ग सशक्त नहीं होगा, तब तक एक समृद्ध राष्ट्र की कल्पना अधूरी है। इसी दृष्टिकोण के साथ उन्होंने ऐसी नीतियों का निर्माण किया जिससे पिछड़ों और दलितों को शिक्षा, रोजगार और मान-सम्मान के समान अवसर प्राप्त हो सकें।
एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व और राजनीतिक विरासत
पुष्कर सिंह धामी ने भावुक स्वर में कहा कि हेमवती नंदन बहुगुणा जैसे व्यक्तित्व सदियों में एक बार जन्म लेते हैं। उनकी कार्यक्षमता, उनकी स्पष्टवादिता और उनका जनता के साथ सीधा जुड़ाव आज के युवा राजनेताओं के लिए एक खुली किताब की तरह है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुगुणा के कृतित्व से हमें यह सीखने को मिलता है कि सार्वजनिक जीवन में शुचिता और सिद्धांतों का पालन करते हुए भी सफलता के शिखर तक पहुँचा जा सकता है। उनकी राजनीतिक विरासत आज भी हमारे बीच जीवित है और हमें जनसेवा के पथ पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
धामी सरकार का संकल्प और बहुगुणा के आदर्श
श्रद्धांजलि अर्पित करने के पश्चात मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान उत्तराखंड सरकार भी उन्हीं महान आदर्शों पर चलने का प्रयास कर रही है जो हेमवती नंदन बहुगुणा जैसे मनीषियों ने स्थापित किए थे। पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार का मुख्य लक्ष्य ‘अन्त्योदय’ है, यानी समाज के सबसे गरीब व्यक्ति का विकास। सरकार की प्रत्येक योजना और नीति में समाज के कमजोर वर्गों का ध्यान रखा जा रहा है, जो बहुगुणा के सपनों के अनुरूप एक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण की दिशा में उठाया गया कदम है।