नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 के आगामी सीजन को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने अपनी कमर कस ली है। हाल ही में टूर्नामेंट के शुरुआती 16 दिनों के लिए 20 मैचों के कार्यक्रम की घोषणा की गई थी। हालांकि, देश के कुछ राज्यों में होने वाले चुनावों और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में चल रहे तनाव के कारण प्रभावित होने वाली हवाई यात्राओं को देखते हुए शेष मैचों का शेड्यूल अभी रोक दिया गया है। इस बीच, बीसीसीआई ने खेल की निष्पक्षता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सभी 10 आईपीएल फ्रेंचाइजी को बेहद सख्त और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश विशेष रूप से टीमों के अभ्यास सत्र और मैदान के उपयोग से संबंधित हैं।
नेट प्रैक्टिस के लिए सख्त नियम
क्रिकबज की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई ने सभी टीमों को आदेश दिया है कि अभ्यास के दौरान किसी भी स्थिति में प्रतिद्वंद्वी टीम द्वारा इस्तेमाल की गई पिच या नेट का उपयोग नहीं किया जाएगा। बीसीसीआई के नए दिशानिर्देशों के मुताबिक, आईपीएल की कोई भी टीम उस विशिष्ट पिच पर अभ्यास नहीं कर पाएगी जिस पर प्रतिद्वंद्वी टीम ने अपना नेट सेशन अभी-अभी समाप्त किया हो। यदि दो टीमें एक के बाद एक (बैक-टू-बैक) अभ्यास कर रही हैं, तो स्थानीय संघ को यह सुनिश्चित करना होगा कि दूसरी टीम को बिल्कुल नई और ताजी पिचें आवंटित की जाएं।
यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि कोई भी टीम अभ्यास के दौरान पिच की स्थिति का अनुचित लाभ न उठा सके या प्रतिद्वंद्वी की तैयारी की रणनीतियों को भांप न सके। बीसीसीआई का मानना है कि हर टीम को अपनी तैयारी के लिए समान और नए संसाधन मिलने चाहिए।
नेट्स और थ्रो-डाउन के लिए भी अलग व्यवस्था
नियम केवल पिच तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नेट और थ्रो-डाउन गतिविधियों के लिए भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्येक टीम को उनके निर्धारित सत्र के लिए नए नेट उपलब्ध कराए जाने अनिवार्य हैं। यदि एक टीम अपना अभ्यास सत्र समाप्त कर लेती है, तो उसके तुरंत बाद आने वाली दूसरी टीम को पहली टीम के नेट या थ्रो-डाउन क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यहां तक कि अगर कोई टीम अपना अभ्यास समय से पहले खत्म कर देती है, तो भी दूसरी टीम उनकी खाली पड़ी रेंज-हिटिंग विकेट का उपयोग नहीं कर सकेगी।
अभ्यास मैच और लाइट प्रैक्टिस के नियम
बीसीसीआई ने उन टीमों के लिए भी नियम स्पष्ट कर दिए हैं जो फ्लड लाइट्स के नीचे यानी ‘अंडर लाइट’ अभ्यास मैच खेलना चाहती हैं। ऐसे मैचों की अधिकतम अवधि साढ़े तीन घंटे तय की गई है। कोई भी फ्रेंचाइजी पूरे सीजन के दौरान अधिकतम दो अभ्यास मैच खेल सकती है, लेकिन इसके लिए उन्हें बीसीसीआई को पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि ये अभ्यास मैच उन मुख्य पिचों पर नहीं खेले जा सकते जिनका उपयोग टूर्नामेंट के आधिकारिक मैचों के लिए किया जाना है।
मुख्य मैदान के उपयोग पर पाबंदी
मैच की गुणवत्ता और पिच की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बीसीसीआई ने एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। किसी भी फ्रेंचाइजी के सीजन के पहले घरेलू मैच से चार दिन पहले तक मुख्य मैदान पर कोई भी अभ्यास सत्र या अभ्यास मैच आयोजित नहीं किया जा सकेगा। यह समय पिच को मैच के लिए तैयार करने (क्युरेटिंग) के लिए आरक्षित रहेगा। यदि इस दौरान घरेलू टीम को अभ्यास की आवश्यकता होती है, तो संबंधित राज्य क्रिकेट संघ को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के एक वैकल्पिक अभ्यास मैदान (ऑप्शनल प्रैक्टिस ग्राउंड) उपलब्ध कराना होगा।
प्रैक्टिस सेशन में मेहमान टीम को प्राथमिकता
अभ्यास सत्रों के समय को लेकर अक्सर टीमों के बीच विवाद की स्थिति बनी रहती है। इसे सुलझाने के लिए बीसीसीआई ने स्पष्ट किया है कि अभ्यास के लिए दोनों टीमों को दो-दो नेट और मुख्य मैदान पर ‘रेंज हिटिंग’ (बड़े शॉट खेलने का अभ्यास) के लिए एक नेट दिया जाएगा। यदि समय को लेकर दोनों टीमों के बीच कोई सहमति नहीं बनती है, तो बीसीसीआई मेहमान टीम के अनुरोध को प्राथमिकता देगा।
बोर्ड ने कहा है कि वैसे तो मेजबान टीम को अपना पसंदीदा सत्र चुनने का पहला अधिकार है, लेकिन मेहमान टीम की यात्रा व्यवस्था और उनके पिछले मैच के अंतराल को देखते हुए उनके अनुरोध पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाना चाहिए। विशेष रूप से यदि मेहमान टीम ने पिछले ही दिन कोई मैच खेला हो, तो उन्हें अभ्यास के समय के चयन में रियायत दी जाएगी।
बीसीसीआई के ये नए और कड़े नियम दर्शाते हैं कि बोर्ड आईपीएल 2026 को किसी भी विवाद से दूर और पेशेवर तरीके से आयोजित करना चाहता है। ये दिशानिर्देश न केवल टीमों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देंगे, बल्कि खिलाड़ियों को चोटों से बचाने और मैदान की स्थिति को बेहतर बनाए रखने में भी सहायक सिद्ध होंगे। सभी 10 फ्रेंचाइजी को इन नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है, अन्यथा उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की जा सकती है।
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