देहरादून। उत्तराखंड में निवेश के अनुकूल माहौल तैयार करने और टिहरी झील को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए सोमवार को सचिवालय में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक हुई। केंद्र सरकार द्वारा गठित टास्क फोर्स की अध्यक्ष मीता राजीव लोचन और मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (फेज 2) के कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया। बैठक में जानकारी दी गई कि उत्तराखंड ने डी-रेगुलेशन 1.0 के अनुपालन में देश भर में पांचवां स्थान हासिल किया है। मीता राजीव लोचन ने राज्य सरकार द्वारा लैंड यूज, होम स्टे और सिंगल विंडो सिस्टम के क्षेत्र में किए गए सुधारों की सराहना की।
फेज-2 के तहत राज्य के लिए नौ प्रमुख प्राथमिकताएं निर्धारित की गई हैं। इनमें भूमि उपयोग, भवन निर्माण की स्वीकृति के लिए प्रभावी सिंगल विंडो सिस्टम, पर्यावरण सुरक्षा और पर्यटन क्षेत्र में नवाचार जैसी महत्वपूर्ण कड़ियां शामिल हैं। टास्क फोर्स की अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘सेल्फ सर्टिफिकेशन’ की व्यवस्था लागू की जाए ताकि छोटे निवेशकों को अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड का विनिर्माण क्षेत्र राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में 26 प्रतिशत का योगदान दे रहा है, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। राज्य में उच्च साक्षरता दर और जीवन की अच्छी गुणवत्ता के कारण निवेश के लिए यह एक आकर्षक गंतव्य बन चुका है।
इसी कड़ी में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने टिहरी झील को एक ‘ग्लोबल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्यटन विभाग को टिहरी झील और उसके आसपास के क्षेत्रों के लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करने को कहा। इसके लिए अनुभवी कंसल्टेंट नियुक्त किए जाएंगे ताकि विकास कार्यों में आधुनिकता और पर्यावरण संतुलन का तालमेल बना रहे। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि टिहरी को वैश्विक मानचित्र पर लाने के लिए वहां विश्व स्तरीय बुनियादी सुविधाओं का निर्माण अनिवार्य है।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को टिहरी झील के चारों ओर रिंग रोड बनाने के कार्य में तेजी लाने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि इस रिंग रोड पर कम से कम दो हेलीपैड विकसित किए जाएं और झील में प्रस्तावित ‘सी प्लेन’ योजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। इस कार्य के लिए वित्त, पर्यटन, नागरिक उड्डयन और लोक निर्माण विभाग को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की हिदायत दी गई है। इसके अतिरिक्त, ऋषिकेश के मुनि की रेती और लोहाघाट चम्पावत के पर्यटन विकास के प्रस्तावों को भी मास्टर प्लान के साथ जोड़कर भारत सरकार को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में राहुल शर्मा, राजेश शर्मा, आर राजेश कुमार, श्रीधर बाबू अदाकी, रंजीत सिन्हा, रविशंकर, दिलीप जावलकर, मधुकर पराग धकाते, आनंद श्रीवास्तव, सौरभ गहरवार, अभिषेक रोहेला और गिरधारी सिंह रावत जैसे उच्चाधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य सचिव ने अंत में सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि वे केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन करें ताकि राज्य की विकास दर में निरंतर बढ़ोतरी हो सके।
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