शिमला। हिमाचल प्रदेश की विकास यात्रा में सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। राजधानी शिमला में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एचपीएसईडीसी) के निदेशक मंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में न केवल कॉर्पोरेशन के कामकाज की समीक्षा की गई, बल्कि कर्मचारियों के कल्याण और संस्थान के भविष्य के स्वरूप को लेकर भी बड़े फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री ने कॉर्पोरेशन को स्पष्ट निर्देश दिए कि वह अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाए और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए अपने कर्मचारियों की जरूरतों का ध्यान रखे।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा निर्देश जारी किया। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि कॉर्पोरेशन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन हर महीने की 7 तारीख तक अनिवार्य रूप से उनके बैंक खातों में पहुंच जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वेतन मिलने में होने वाली देरी से इन कर्मचारियों को अपनी दैनिक वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सरकार का मानना है कि समय पर वेतन मिलने से न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि उनकी कार्यक्षमता में भी सुधार होगा। यह निर्णय उन सैकड़ों परिवारों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है जो अपनी आजीविका के लिए कॉर्पोरेशन पर निर्भर हैं।
निदेशक मंडल की बैठक में एचपीएसईडीसी के वित्तीय प्रदर्शन पर भी विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कॉर्पोरेशन द्वारा अर्जित किए गए लाभ और टर्नओवर की सराहना की। बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान एचपीएसईडीसी ने 275 करोड़ रुपये का टर्नओवर दर्ज किया था, जिसमें संस्थान को 15 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। संस्थान की प्रगति का सिलसिला अगले वर्ष भी जारी रहा और वित्त वर्ष 2024-25 में टर्नओवर बढ़कर 300 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि शुद्ध लाभ में भी वृद्धि हुई और यह 18 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वर्तमान वित्तीय वर्ष की प्रगति रिपोर्ट साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक कॉर्पोरेशन ने 199.25 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि संस्थान राज्य की अर्थव्यवस्था में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने तकनीकी शुल्कों (टेक्निकल चार्जेस) की दरों में संशोधन करने के निर्देश भी दिए। नई व्यवस्था के तहत, अब निविदाओं (टेंडर्स) की राशि के आधार पर शुल्कों का निर्धारण किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि पांच करोड़ रुपये तक की निविदाओं के लिए तकनीकी शुल्क पांच प्रतिशत की दर से तय किया जाए। इसी प्रकार, पांच करोड़ रुपये से अधिक और दस करोड़ रुपये तक की निविदाओं के लिए शुल्क तीन प्रतिशत और दस करोड़ रुपये से अधिक की निविदाओं के लिए शुल्क की दर दो प्रतिशत रखी जाए। इस श्रेणीबद्ध शुल्क प्रणाली से बड़ी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में स्पष्टता आएगी और निवेशकों व अन्य हितधारकों को लाभ मिलेगा।
बैठक का एक सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला कॉर्पोरेशन के नाम में बदलाव को लेकर रहा। हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एचपीएसईडीसी) का नाम बदलकर अब ‘हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स मैनपावर एंड ओवरसीज एम्प्लॉयमेंट कॉर्पोरेशन’ करने को निदेशक मंडल ने अपनी मंजूरी दे दी है। नाम में इस बदलाव के पीछे एक बड़ा उद्देश्य छिपा है। दरअसल, यह कॉर्पोरेशन अब केवल इलेक्ट्रॉनिक्स विकास तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह राज्य के युवाओं को विदेशों में रोजगार के अवसर दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नाम में बदलाव संस्थान की नई जिम्मेदारियों और इसके विस्तारित कार्यक्षेत्र को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। राज्य सरकार चाहती है कि हिमाचल के प्रतिभाशाली युवाओं को वैश्विक स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हों और यह संस्थान इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सेतु का कार्य करेगा।
संस्थान के इस नए स्वरूप से हिमाचल प्रदेश के उन युवाओं में उम्मीद की नई लहर दौड़ेगी जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। ओवरसीज एम्प्लॉयमेंट की सुविधा मिलने से युवाओं को रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और उन्हें एक विश्वसनीय सरकारी मंच के माध्यम से विदेशों में नौकरी पाने में सहायता मिलेगी। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित करें ताकि वे वैश्विक बाजार की प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़े हो सकें।
बैठक के समापन पर मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन सुधारों और नई पहचान के साथ यह संस्थान प्रदेश के विकास में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाएगा। इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव संजय गुप्ता, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, सचिव (डीडीटीजी) आशीष सिंघमार, उद्योग आयुक्त युनूस, निदेशक (डीडीटीजी) डॉ. निपुण जिंदल और एचपीएसईडीसी के प्रबंध निदेशक हरबंस ब्रासकोन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों से आह्वान किया कि वे सरकार की लोक-हितैषी नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य करें ताकि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक विकास की इस प्रक्रिया से लाभान्वित हो सके।