देहरादून।
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुपालन में उत्तराखंड में चुनावी तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम के कुशल मार्गदर्शन में प्रदेश की इलेक्शन मशीनरी जमीन पर उतरकर काम कर रही है। वर्तमान में राज्य में प्री एसआईआर (स्पेशल इंटरिम रिवीजन) गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिसके तहत बीएलओ आउटरीच अभियान के माध्यम से प्रत्येक मतदाता तक पहुंचने की योजना है। इस अभियान का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के हर नागरिक के साथ सीधा संवाद स्थापित करना और मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करना है।
अभियान के पहले चरण में निर्वाचन विभाग को बड़ी सफलता हासिल हुई है। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने इस महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य के सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में इलेक्शन मशीनरी ने अत्यंत उत्साहपूर्वक कार्य किया है। बीएलओ और ईआरओ की सक्रियता का ही परिणाम है कि पहले चरण में प्रदेश के 75 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया है। यह आंकड़ों के मिलान और मतदाता सूची के शुद्धिकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
पहले चरण की इस बड़ी उपलब्धि के बाद अब प्रशासन दूसरे चरण की तैयारियों में जुट गया है। बीएलओ आउटरीच अभियान के दूसरे चरण की औपचारिक शुरुआत 1 फरवरी से होने जा रही है। विभाग ने इस बार अपना मुख्य ध्यान राज्य के युवाओं और महिला मतदाताओं पर केंद्रित किया है। निर्वाचन आयोग की मंशा है कि प्रदेश की महिला शक्ति और नए पात्र युवा मतदाताओं को मतदाता सूची में प्राथमिकता के आधार पर जोड़ा जाए। आउटरीच अभियान का यह दूसरा चरण 15 फरवरी 2026 तक संचालित किया जाएगा, जिसमें घर-घर जाकर सत्यापन का कार्य किया जाएगा।
इस विशेष अभियान के दौरान एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया वर्तमान मतदाता सूची का वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान करने की भी है। प्री एसआईआर फेज में यह मैपिंग इसलिए की जा रही है ताकि मतदाताओं के विवरण की ऐतिहासिक शुद्धता जांची जा सके। विजय कुमार जोगदंडे ने राज्य के नागरिकों से विशेष अपील की है कि जब बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) उनके द्वार पर आएं, तो वे इस समन्वय और संवाद की प्रक्रिया में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें।
मतदाताओं की सुविधा के लिए विभाग ने तकनीक का भी सहारा लिया है। वर्ष 2003 की पुरानी वोटर लिस्ट को मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड की आधिकारिक वेबसाइट ceo.uk.gov.in पर सार्वजनिक कर दिया गया है। कोई भी मतदाता इस पोर्टल पर जाकर अपने विधानसभा क्षेत्र, अपने नाम या अपने पिता/पति के नाम के आधार पर अपना पुराना रिकॉर्ड देख सकता है। इसके अलावा वेबसाइट पर गली, मोहल्ले और क्षेत्र के नाम से भी मतदाता क्रमांक एवं बूथ संख्या खोजने की सुगम सुविधा प्रदान की गई है।
निर्वाचन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। इसी क्रम में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) नियुक्त करने का अनुरोध किया गया था। वर्तमान में प्रदेश भर में 12,070 बीएलए की नियुक्ति की जा चुकी है। प्रशासन ने राजनीतिक दलों से आग्रह किया है कि वे शत-प्रतिशत बूथों पर अपने एजेंट नियुक्त करें ताकि मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहे। निर्वाचन आयोग की इस व्यापक कवायद से उम्मीद है कि उत्तराखंड की आगामी मतदाता सूची अधिक विश्वसनीय और समावेशी बनकर उभरेगी।
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