देहरादून।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उठाए गए क्रांतिकारी कदमों को अब फिल्मी पर्दे के माध्यम से जनता के बीच लाया गया है। प्रदेश में लागू किए गए देश के सबसे सख्त नकल विरोधी कानून की सफलता और उसकी आवश्यकता को दर्शाने वाली शॉर्ट फिल्म ‘आखिरी कोशिश’ का आधिकारिक विमोचन किया गया है। यह फिल्म राज्य सरकार के उस ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करती है, जिसने प्रदेश की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की एक नई मिसाल पेश की है।
पुष्कर सिंह धामी ने जब इस कठोर कानून को लागू करने का निर्णय लिया था, तो उनका मुख्य उद्देश्य राज्य में दशकों से सक्रिय नकल माफिया के गठजोड़ को पूरी तरह ध्वस्त करना था। सरकार की इस दृढ़ इच्छाशक्ति का ही परिणाम रहा कि नकल माफिया की कमर टूट गई और भर्ती परीक्षाओं में होने वाली धांधली पर पूर्ण विराम लग गया। इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन का सबसे सुखद पहलू यह रहा कि अब तक 28,000 से अधिक युवाओं को पूरी पारदर्शिता और योग्यता के आधार पर सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां प्रदान की गई हैं। यह फिल्म इसी न्यायपूर्ण और निष्पक्ष व्यवस्था की जीत को दिखाती है।
शॉर्ट फिल्म ‘आखिरी कोशिश’ की विषयवस्तु ईमानदारी, कड़ी मेहनत और सुशासन के संदेश पर आधारित है। फिल्म यह संदेश देती है कि कैसे एक भ्रष्टाचार मुक्त परीक्षा प्रणाली युवाओं के सपनों को नई उड़ान दे सकती है। यह फिल्म केवल युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के हर उस वर्ग के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो ईमानदारी और मेहनत में विश्वास रखता है। इसमें यह बखूबी चित्रित किया गया है कि योग्यता के आधार पर चयन होने से न केवल व्यक्तिगत विकास होता है, बल्कि पूरे समाज का व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फिल्म के विमोचन के अवसर पर कहा कि राज्य सरकार का सबसे बड़ा संकल्प युवाओं के भविष्य के साथ होने वाले किसी भी खिलवाड़ को रोकना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सख्त नकल विरोधी कानून उत्तराखंड में सुशासन और पारदर्शिता की एक मजबूत नींव है। धामी के अनुसार, योग्यता के आधार पर चयन की इस प्रणाली ने राज्य के युवाओं में एक नया आत्मविश्वास पैदा किया है, जिससे वे अब बिना किसी डर के अपनी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
यह शॉर्ट फिल्म विशेष रूप से युवाओं से यह अपील करती है कि वे इसे देखें और यह समझें कि कैसे ईमानदारी और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है। ‘आखिरी कोशिश’ उत्तराखंड की उस बदलती पहचान का आईना है, जहां अब नकल माफिया के लिए कोई जगह नहीं बची है और जहां केवल मेहनत करने वालों की जीत सुनिश्चित की गई है। सरकार की इस पहल को युवाओं के सपनों को सुरक्षित करने वाला एक सुरक्षा कवच माना जा रहा है, जो आने वाले समय में प्रदेश के विकास में बड़ी भूमिका निभाएगा।