चंडीगढ़। पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को एक नया स्वरूप देने के लिए सड़क निर्माण की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और ऐतिहासिक योजना का आगाज़ किया है। इस विशाल परियोजना के तहत राज्य की हजारों लिंक सड़कों की मरम्मत और उनके स्तर को सुधारने (अपग्रेडेशन) का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य गांवों को शहरों के साथ आधुनिक सड़कों के माध्यम से जोड़ना है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिल सके।
आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में कुल 30,237 लिंक सड़कें हैं, जिनमें से प्रथम चरण में 7,373 महत्वपूर्ण सड़कों का चयन किया गया है। इन चयनित सड़कों की कुल लंबाई लगभग 19,491.56 किलोमीटर है। इस पूरी योजना पर राज्य सरकार 4,150.42 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च करने जा रही है। यह निवेश न केवल सड़कों की गुणवत्ता सुधारेगा, बल्कि आने वाले समय में आवाजाही को और अधिक सुगम और सुरक्षित बनाएगा।
इस सड़क विकास परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसमें आधुनिक तकनीक का समावेश है। पंजाब सरकार ने सड़कों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए पहली बार ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (एआई) आधारित वैज्ञानिक सर्वेक्षण का सहारा लिया है। इस वैज्ञानिक आकलन से न केवल पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है, बल्कि निर्माण लागत में भी महत्वपूर्ण कमी दर्ज की गई है। एआई आधारित इस सटीक सर्वे के कारण परियोजना में लगभग 383.53 करोड़ रुपये की सीधी बचत संभव हो सकी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता के मामले में किसी भी स्तर पर कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक नई पहल करते हुए ‘सड़क बुनियादी ढांचा विकास बैठक’ का आयोजन शुरू किया है। इस मंच के माध्यम से मंडी बोर्ड और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) जैसे महत्वपूर्ण विभागों को सीधे तौर पर जवाबदेह बनाया गया है। इसके अलावा, सड़कों के दीर्घकालिक टिकाऊपन के लिए सरकार ने अगले पांच वर्षों के रखरखाव हेतु 725.75 करोड़ रुपये का एक अलग बजट भी निर्धारित किया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि निर्माण के बाद सड़कें उपेक्षा का शिकार न हों और उनकी स्थिति बेहतर बनी रहे।
सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मान सरकार ने 91.83 करोड़ रुपये की लागत से एक विशेष सुरक्षा परियोजना लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत राज्य के सभी ग्रामीण स्कूलों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों के पास अनिवार्य रूप से ज़ेबरा क्रॉसिंग और चेतावनी संकेत लगाए जाएंगे। साथ ही, यात्रियों की सुविधा के लिए प्रत्येक दो किलोमीटर की दूरी पर सूचना बोर्ड स्थापित किए जाएंगे ताकि उन्हें सही जानकारी और दिशा-निर्देश मिल सकें।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस योजना पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह केवल सड़क निर्माण का कार्य नहीं है, बल्कि यह पंजाब की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की एक सुनियोजित नीति है। जब गांवों की सड़कें बेहतर होंगी, तो किसानों, स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों की पहुंच मुख्य बाजारों और विकास केंद्रों तक आसान होगी। इससे व्यापार और कृषि दोनों क्षेत्रों को लाभ मिलेगा और पंजाब आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनेगा। सरकार का यह कदम प्रदेश के गांवों में खुशहाली लाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। इस योजना से ग्रामीण आबादी का जीवन स्तर सुधरेगा और विकास की मुख्यधारा से उनका जुड़ाव और गहरा होगा।
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