Uttarakhand: शिक्षा को रोजगार और कौशल से जोड़ने के लिए उत्तराखंड सरकार प्रतिबद्ध बोले मुख्यमंत्री धामी

रुड़की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को कन्हैया लाल डीएवी महाविद्यालय, रुड़की में आयोजित सम्मान समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक समाज की चेतना के मार्गदर्शक होते हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिस समाज में शिक्षकों को सम्मान और सुरक्षा मिलती है, वही समाज प्रगति की ऊंचाइयों को छूता है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और व्यावहारिक बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा के प्रति सरकार के विजन को साझा करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार शिक्षा को केवल परीक्षाओं और डिग्रियों के बोझ तक सीमित नहीं रखना चाहती। सरकार का लक्ष्य शिक्षा को कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) से जोड़कर युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए द्वार खोलना है। उन्होंने याद दिलाया कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने नई शिक्षा नीति को सबसे पहले लागू किया। इसी नीति के तहत अब प्रदेश के विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और बिग डेटा जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं, ताकि उत्तराखंड के युवा भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 20 मॉडल कॉलेजों की स्थापना की जा रही है। छात्र-छात्राओं के लिए आधुनिक आईटी लैब, महिला छात्रावास और सुव्यवस्थित परीक्षा भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने ब्रिटेन के साथ ‘शेवनिंग उत्तराखंड छात्रवृत्ति’ का समझौता किया है, जिसके तहत प्रतिवर्ष 5 मेधावी छात्रों को मास्टर्स की पढ़ाई के लिए ब्रिटेन भेजा जाएगा। इसके अतिरिक्त, देश के शीर्ष 100 संस्थानों में प्रवेश पाने वाले उत्तराखंड के युवाओं को सरकार 50,000 रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि प्रदान कर रही है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से ‘नौकरी मांगने वाले के बजाय नौकरी देने वाला’ बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार अनुकूल नीतियां बना रही है। राज्य के महाविद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ ही 9 नए महाविद्यालयों की स्थापना की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। शोध कार्य को बढ़ावा देने के लिए उत्कृष्ट शोध पत्रों के प्रकाशन पर भी सरकार पुरस्कार प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले नकल माफियाओं के विरुद्ध देश का सबसे सख्त कानून लागू किया गया है, जिसके तहत अब तक 100 से अधिक माफिया जेल भेजे जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े चार वर्षों में 26 हजार से अधिक युवाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरियां मिली हैं।

मदरसा शिक्षा पर एक बड़ा निर्णय साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का फैसला लिया गया है। उन्होंने घोषणा की कि 1 जुलाई 2026 के बाद उत्तराखंड में केवल वही मदरसे संचालित हो पाएंगे जो सरकार द्वारा निर्धारित आधुनिक पाठ्यक्रम पढ़ाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक शिक्षा के नाम पर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले अयोग्य गुरुओं पर नियंत्रण लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य बच्चों का समग्र विकास होना चाहिए, न कि उन्हें पिछड़ी मानसिकता की ओर धकेलना।

समारोह के दौरान राज्यसभा सांसद डॉ. कल्पना सैनी, विधायक प्रदीप बत्रा और महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. महेंद्रपाल सिंह सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री के इस संबोधन ने राज्य के शैक्षणिक परिदृश्य को बदलने के सरकार के संकल्प को एक बार फिर मजबूती प्रदान की है। सरकार का यह स्पष्ट संदेश है कि देवभूमि में शिक्षा के मानकों के साथ कोई समझौता नहीं होगा और प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार मिलेगा।

 

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