कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक टीम ने साल्टलेक सेक्टर-5 स्थित आई-पैक (I-PAC) के कार्यालय पर अचानक छापेमारी की। आई-पैक वह संस्था है जो पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक और चुनावी प्रबंधन का सारा काम देखती है। गुरुवार, 8 जनवरी की सुबह शुरू हुई यह कार्रवाई केवल आई-पैक के दफ्तर तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि ईडी की टीम ने कंपनी के मालिक प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित कार्यालय और उनके आवास पर भी एक साथ दस्तक दी।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ईडी की यह टीम विशेष रूप से दिल्ली से कोलकाता पहुंची है। बताया जा रहा है कि यह पूरी कार्रवाई बंगाल के चर्चित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में की जा रही है। छापेमारी की खबर मिलते ही प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। इस दौरान सबसे चौंकाने वाला दृश्य तब देखने को मिला जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद प्रतीक जैन के आवास पर पहुंच गईं। ममता बनर्जी के पहुंचने से मात्र पांच मिनट पहले ही कोलकाता के पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा भी वहां पहुंचे थे, जिससे केंद्र और राज्य की एजेंसियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई।
ममता बनर्जी जब आई-पैक के दफ्तर से बाहर निकलीं, तो उनके हाथों में कुछ महत्वपूर्ण फाइलें और लैपटॉप देखे गए। उन्होंने मौके पर मौजूद मीडिया कर्मियों से बात करते हुए इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। ममता बनर्जी ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक केंद्रीय एजेंसी इस तरह से एक निजी संस्था के कार्यालय पर छापेमारी कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इस दफ्तर में तृणमूल कांग्रेस के अत्यंत गोपनीय दस्तावेज, भविष्य की चुनावी रणनीतियां और पार्टी के संभावित उम्मीदवारों की सूचियां रखी हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि वह पार्टी की महत्वपूर्ण फाइलों और हार्ड डिस्क को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें अपने साथ लेकर जा रही हैं। उन्होंने आशंका जताई कि छापेमारी के नाम पर उनकी पार्टी के गोपनीय डेटा को अवैध रूप से इकट्ठा करने और उनकी रणनीतियों को चुराने की कोशिश की जा रही है। ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सीधे चुनौती देते हुए सवाल किया कि क्या वे कभी भाजपा के पार्टी कार्यालयों पर भी इसी तरह ईडी की छापेमारी करवाने का साहस जुटा पाएंगे।
ममता बनर्जी ने आगे आरोप लगाया कि केंद्र सरकार दोहरे मोर्चे पर काम कर रही है। एक तरफ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से जानबूझकर मिटाए जा रहे हैं और दूसरी तरफ विपक्षी दलों की संवेदनशील जानकारियों को हासिल करने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से उनकी पार्टी और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को डराने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे वे सफल नहीं होने देंगी।
इस छापेमारी के बाद कोलकाता में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। ईडी की टीम अभी भी दस्तावेजों की पड़ताल और डिजिटल साक्ष्यों को खंगालने में जुटी है, वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इसे आगामी चुनावों से पहले विपक्षी आवाजों को दबाने का षड्यंत्र बताया है। आई-पैक जैसी संस्था, जिसने बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी, उसके ऊपर इस तरह की कानूनी कार्रवाई भविष्य में राज्य की राजनीति को एक नए मोड़ पर ले जा सकती है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने केंद्र और राज्य सरकार के बीच चल रहे पुराने विवादों को और अधिक गहरा कर दिया है।