Uttarakhand: मानव और वन्यजीव सुरक्षा के लिए उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम और हिल बाइपास खोलने की मिली मंजूरी – The Hill News

Uttarakhand: मानव और वन्यजीव सुरक्षा के लिए उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम और हिल बाइपास खोलने की मिली मंजूरी

देहरादून। उत्तराखंड में वन्यजीवों के बढ़ते हमलों और मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को सचिवालय में आयोजित राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की और अधिकारियों को इस दिशा में अधिक प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जनसुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कुल 31 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक में स्पष्ट किया कि वन्यजीवों के हमलों से मानव जीवन और संपत्ति की सुरक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों में भालू, गुलदार, बाघ और हाथी जैसे वन्यजीव अधिक सक्रिय हैं, वहां वन विभाग और जिला प्रशासन मिलकर संयुक्त निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव प्रभावित क्षेत्रों में केवल पारंपरिक गश्त से काम नहीं चलेगा, बल्कि वहां डिजिटल निगरानी और अर्ली वार्निंग सिस्टम (पूर्व चेतावनी प्रणाली) को भी सक्रिय किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री ने कई तकनीकी और सुरक्षात्मक उपायों पर जोर दिया। उन्होंने आदेश दिया कि संवेदनशील गांवों में सोलर फेंसिंग, बायो फेंसिंग और हनी-बी (मधुमक्खी) फेंसिंग जैसे सुरक्षा इंतजाम किए जाएं। साथ ही निगरानी के लिए वाच टावर बनाए जाएं और रैपिड रिस्पांस टीमों को हर समय अलर्ट मोड पर रखा जाए। ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर शिविर आयोजित करने और संवेदनशील जिलों व ब्लॉकों की ‘हॉटस्पॉट मैपिंग’ तत्काल पूरी करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अतिरिक्त, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और जलस्रोतों के आसपास सुरक्षा घेरा मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई, ताकि कचरे की वजह से वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर न आएं।

बैठक में वन्यजीवों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक मार्ग (कॉरिडोर) को सुरक्षित रखने पर भी विशेष बल दिया गया। पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हाथी और बाघ जैसे जीवों के कॉरिडोर का संरक्षण शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए। वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए सड़कों और अन्य विकास परियोजनाओं के बीच एनिमल पास, अंडरपास और ओवरपास का निर्माण सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि वन्यजीव संरक्षण के पुराने नियमों में संशोधन की आवश्यकता है, तो विभाग इसका परीक्षण कर शासन को प्रस्ताव भेजे। वन प्रभागों में पशु चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए भी आवश्यक प्रबंध करने को कहा गया।

इस बैठक में हरिद्वार के बहुप्रतीक्षित हिल बाइपास को सालभर खोलने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिल गई। राजाजी नेशनल पार्क से गुजरने वाला यह मार्ग लंबे समय से क्षतिग्रस्त होने के कारण बंद था, जिससे स्थानीय यातायात प्रभावित हो रहा था। अब इसे दुरुस्त कर वर्षभर के लिए खोल दिया जाएगा। इसके अलावा, केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य में छह पेयजल योजनाओं, राजाजी नेशनल पार्क में वन मार्ग के निर्माण और हरिद्वार व कालसी वन प्रभागों में उपखनिज चुगान से जुड़े 22 प्रस्तावों को अनुमोदित किया गया। इन प्रस्तावों को अब अंतिम स्वीकृति के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड को भेजा जाएगा।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बैठक के दौरान कहा कि बोर्ड के ये निर्णय वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच एक बेहतर संतुलन स्थापित करेंगे। बैठक में विधायक दीवान सिंह बिष्ट, सुरेश सिंह चौहान, बंशीधर भगत समेत प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु, प्रमुख मुख्य वन संरक्षक आरके मिश्र और डीजीपी दीपम सेठ जैसे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरकार के इन फैसलों से न केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होने की उम्मीद है, बल्कि राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास को भी नई गति मिलेगी।

 

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