देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी कामकाज को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को सचिवालय में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारियों के साथ हुई बैठक में मुख्य सचिव ने सरकारी संपत्तियों की मैपिंग को लेकर सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने सभी विभागीय सचिवों और विभागाध्यक्षों को आदेश दिया कि वे 31 मार्च 2026 तक हर हाल में अपने विभागों के अंतर्गत आने वाली सभी सरकारी संपत्तियों की मैपिंग ‘उत्तराखंड गवर्नमेंट एसेट मैनेजमेंट सिस्टम’ पर करवा लें। यह कदम सरकारी संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और रिकॉर्ड रखने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
बैठक के दौरान जनपद स्तर पर काफी समय से लटके हुए पुराने मामलों पर भी चर्चा की गई। संबंधित विभागीय सचिवों के साथ विचार विमर्श के बाद कई प्रकरणों का मौके पर ही निस्तारण किया गया जिससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आई है। मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को कड़े निर्देश दिए कि जो 108 एंबुलेंस और विभागीय एंबुलेंस खराब या जर्जर हालत में हैं उन्हें बिना किसी देरी के जल्द से जल्द बदला जाए ताकि मरीजों को किसी तरह की असुविधा न हो।
किसानों के हित में चलाई जा रही एग्री स्टैक योजना की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने इसमें तेजी लाने को कहा। उन्होंने अंश निर्धारण, डिजिटल क्रॉप सर्वे और किसानों के पंजीकरण कार्य को प्राथमिकता पर रखने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने पाया कि कुछ जनपदों ने इस दिशा में बेहतरीन काम किया है जबकि कुछ जिलों को अभी और मेहनत करने की जरूरत है। उन्होंने सभी को लक्ष्य समय पर पूरा करने की नसीहत दी।
इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रमुख सचिव विधायी धनंजय चतुर्वेदी, सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, रंजीत कुमार सिन्हा, चंद्रेश कुमार यादव, दीपक रावत, विनय शंकर पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन, रणवीर सिंह चौहान और धीराज सिंह गर्ब्याल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनपदों के जिलाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने मुख्य सचिव के निर्देशों का पालन करने और विकास कार्यों में गति लाने का भरोसा दिलाया।