देहरादून. उत्तराखंड अब केवल एक पर्वतीय राज्य नहीं रहा, बल्कि यह देश में निवेश, नवाचार और अध्यात्म का एक नया और सशक्त केंद्र बनकर उभर रहा है। यह बात प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को देहरादून में आयोजित टाइम्स ऑफ इंडिया के ‘डेस्टिनेशन उत्तराखंड 2.0’ कॉन्क्लेव में कही। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास मॉडल, भविष्य की संभावनाओं और अब तक की उपलब्धियों का विस्तृत खाका खींचा। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनौतियों के बावजूद राज्य स्थापना के 25 वर्षों के सफर में उत्तराखंड ने उल्लेखनीय प्रगति की है, खासकर पिछले कुछ वर्षों में डबल इंजन सरकार के प्रयासों से विकास की गति तेज हुई है।
मुख्यमंत्री धामी ने राज्य में आ रहे औद्योगिक बदलावों पर प्रमुखता से बात की। उन्होंने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 को राज्य के आर्थिक इतिहास की एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। मुख्यमंत्री ने आंकड़ों के जरिए बताया कि इस समिट में राज्य को 3.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव अब तक धरातल पर उतर चुके हैं, जो केवल कागजी नहीं हैं। उन्होंने बताया कि राज्य को निवेशकों के लिए पसंदीदा गंतव्य बनाने के लिए सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत किया है और 30 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में अचीवर्स श्रेणी और स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर श्रेणी हासिल करना सरकार की इन्हीं नीतियों का परिणाम है।
कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड को ‘विश्व की आध्यात्मिक राजधानी’ के रूप में विकसित करने के अपने संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि देवभूमि की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ उनका आधुनिकीकरण किया जा रहा है। केदारखंड और मानसखंड क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण के कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। इसके अलावा हरिपुर कालसी में यमुना तीर्थ स्थल का पुनरुद्धार, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब उत्तराखंड की पहचान केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि एडवेंचर टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, फिल्म शूटिंग और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी राज्य ने अपनी वैश्विक पहचान बनाई है। शीतकालीन यात्रा की पहल से अब साल भर पर्यटन गतिविधियां चल रही हैं।
सुशासन और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने सरकार का कड़ा रुख स्पष्ट किया। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर सभी नागरिकों के लिए एक समान न्याय व्यवस्था सुनिश्चित की है। इसके अलावा सरकार ने लैंड जिहाद, लव जिहाद, धर्मांतरण और नकल माफियाओं के खिलाफ सख्त कानून बनाकर निर्णायक कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है और 250 से अधिक अवैध मदरसों को बंद किया गया है। पारदर्शिता के कारण ही 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है और बेरोजगारी दर में रिकॉर्ड 4.4 प्रतिशत की कमी आई है।
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड और ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय आर्थिकी मजबूत हो रही है। नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्यों (SDG) इंडेक्स में देश में प्रथम स्थान प्राप्त करना राज्य की प्रगति का प्रमाण है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जनसहयोग से उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, अपर सचिव बंशीधर तिवारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।