नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति और आस्था से जुड़ी रामायण की कथा एक बार फिर बड़े पर्दे पर नए अंदाज में प्रस्तुत की गई है। निर्देशक नितेश तिवारी और निर्माता नमित मल्होत्रा की फिल्म ‘रामायणम्’ आधुनिक सिनेमाई तकनीक, शानदार विजुअल्स और पौराणिक कथा के मेल से दर्शकों को एक भव्य अनुभव देने की कोशिश करती है। करीब तीन घंटे की इस फिल्म में भगवान राम के जीवन, रावण के अहंकार और धर्म-अधर्म के संघर्ष को नए सिनेमाई रूप में दिखाया गया है।
रामायण की कहानी दर्शकों के लिए नई नहीं है। इसे पहले भी टेलीविजन और फिल्मों के माध्यम से कई बार प्रस्तुत किया जा चुका है। ऐसे में फिल्म के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुरानी कथा को नए तरीके से पेश करने की थी। नितेश तिवारी ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए कहानी में भव्यता के साथ भावनात्मक पहलुओं को भी जगह दी है।
क्या है फिल्म की कहानी
फिल्म की शुरुआत देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष से होती है। लंका पर विजय के बाद रावण की मां कैकसी उसे अपने लक्ष्य की याद दिलाती हैं। इसके बाद रावण कठोर तपस्या कर ब्रह्मा से वरदान प्राप्त करता है और कुबेर की लंका पर अधिकार जमा लेता है। दूसरी ओर अयोध्या में राजा दशरथ के घर राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म होता है।
कहानी आगे बढ़ती है और गुरु विश्वामित्र राम को अपने यज्ञ की रक्षा के लिए साथ ले जाते हैं। राम ताड़का और सुबाहु जैसे राक्षसों का अंत करते हैं। इसके बाद सीता स्वयंवर, राम वनवास और वन में घटने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं को दिखाया गया है। फिल्म में शूर्पणखा और लक्ष्मण का प्रसंग, रावण और जटायु के बीच संघर्ष तथा सीता के साहसी व्यक्तित्व को भी प्रमुखता दी गई है। कुछ नए प्रसंग कहानी को अलग अंदाज देते हैं।
निर्देशन और कलाकारों का प्रदर्शन
नितेश तिवारी ने अयोध्या के राजसी वैभव, घने जंगलों और सोने की लंका को बड़े पैमाने पर पर्दे पर उतारा है। वीएफएक्स और सीजीआई का इस्तेमाल फिल्म की भव्यता बढ़ाता है। हालांकि कुछ प्रसंगों को सीमित समय में समेटने के कारण कहानी की गति तेज महसूस होती है।
भगवान राम के किरदार में रणबीर कपूर ने शांति, संयम और करुणा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। वहीं रावण के रूप में यश अपने दमदार व्यक्तित्व और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस से खास छाप छोड़ते हैं। शरद केलकर की आवाज रावण के किरदार को और प्रभावशाली बनाती है।
सीता के रूप में साई पल्लवी का अभिनय सहज और भावपूर्ण है। रवि दुबे ने लक्ष्मण के समर्पण और उग्र स्वभाव को अच्छी तरह निभाया है। शूर्पणखा के किरदार में रकुल प्रीत सिंह भी प्रभावी नजर आती हैं। अरुण गोविल राजा दशरथ और लारा दत्ता कैकेयी की भूमिका में दिखाई देते हैं। काजल अग्रवाल मंदोदरी और अंजिक्य देव विश्वामित्र के किरदार में हैं। जटायु के रूप में अनुपम खेर फिल्म के भावनात्मक दृश्यों को खास गहराई दे
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