देहरादून, 4 नवंबर। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जनपदों के अधिकारियों के साथ विभिन्न विभागों के लंबित प्रकरणों और प्रस्तावों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने विकास योजनाओं की उपयोगिता, कोल्ड स्टोरेज संचालन, मोबाइल नेटवर्क से वंचित क्षेत्रों की पहचान, स्वास्थ्य सेवाओं और विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद स्तर से विकास योजनाओं के प्रस्ताव तैयार करते समय उनकी आवश्यकता, उपयोगिता और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन किया जाए। शासन को प्रस्ताव भेजने से पहले उनका लागत-लाभ विश्लेषण (कॉस्ट बेनिफिट एनालिसिस) अनिवार्य रूप से कराया जाए। उन्होंने कहा कि इससे प्रस्तावित योजनाओं की वास्तविक जरूरत और उनसे मिलने वाले लाभ का आकलन करने में मदद मिलेगी।
स्वयं सहायता समूहों को दिया जाएगा कोल्ड स्टोरेज संचालन का प्रशिक्षण
कोल्ड स्टोरेज के संचालन में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए मुख्य सचिव ने अच्छे कार्य कर रहे स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से भी इनके संचालन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समूहों को इसके लिए जरूरी तकनीकी दक्षता और विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे कोल्ड स्टोरेज का संचालन कर सकें। साथ ही प्रदेश में वर्तमान और भविष्य की जरूरतों का आकलन कर इस संबंध में आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने को कहा।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क विहीन स्थानों की होगी पहचान
मुख्य सचिव ने प्रदेश में मोबाइल नेटवर्क की सुविधा से वंचित क्षेत्रों यानी शैडो एरिया का व्यापक सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए। सभी जिलाधिकारियों को शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे स्थानों की पहचान कर उनकी सूची शीघ्र शासन को भेजने को कहा गया है।
उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर भी नेटवर्क विहीन हिस्सों का विस्तृत विवरण तैयार करने के निर्देश दिए। इसमें यह स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाएगा कि राजमार्ग के किस किलोमीटर से किस किलोमीटर तक मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग को दूरसंचार विभाग (डीओटी) से भी आवश्यक जानकारी जुटाने को कहा गया है। इसका उद्देश्य नेटवर्क से वंचित क्षेत्रों में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना है।
15 नवंबर तक ऑपरेशनल हो त्यूणी उप जिला अस्पताल
स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने देहरादून जिले के त्यूणी उप जिला अस्पताल को 15 नवंबर तक अनिवार्य रूप से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पताल शुरू करने के लिए चिकित्सकों सहित जरूरी मानव संसाधन, उपकरण और अन्य आधारभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। इससे क्षेत्र के लोगों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
विद्यालयों में सफाई और भवनों की मरम्मत पर जोर
मुख्य सचिव ने विद्यालयों में स्वच्छता व्यवस्था को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों के शौचालयों और पूरे परिसर की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके। इसके लिए प्रधानाचार्यों को उपलब्ध कराए जाने वाले अनटाइड फंड में जरूरत के अनुसार बढ़ोतरी की संभावनाओं पर विचार करने को कहा गया। इससे विद्यालय स्थानीय आवश्यकताओं के मुताबिक सफाई और रखरखाव के कार्य करा सकेंगे।
उन्होंने विद्यालय भवनों की मरम्मत और नए भवनों के निर्माण से जुड़े कार्यों को भी प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, अमित कुमार सिन्हा, सहदेव सिंह, सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, दिलीप जावलकर, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप, कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत और विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
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